मंसाछापर। क्षेत्र के गोईती बुजुर्ग गांव स्थित सबया आबादकारी टोला में मंगलवार को आग का कहर बरपा कि देखते ही देखते खुशियां राख के ढेर में तब्दील हो गईं। भीषण आग की चपेट में आने से 60 झोपड़ियां जलकर खाक हो गईं। चारों ओर चीख-पुकार, धुएं का गुबार और अपनों को खोने का डर था। लोग बेबस थे, लेकिन इसी बीच दो युवाओं ने मसीहा बनकर मौत के मुंह से जिंदगियां छीन लीं।
आग की भयावहता देख जहां हर कोई पीछे हट रहा था, वहीं पड़ोसी गांव मिश्रौली निवासी विकास जायसवाल (32) और शैलेंद्र भारती (28) ने साहस की मिसाल पेश की। जैसे ही इन्हें हादसे की सूचना मिली, ये बिना समय गंवाए मौके पर पहुंचे। मौके का मंजर डरावना था, पर इनके कदम नहीं डगमगाए। अपनी जान जोखिम में डालकर दोनों युवक धधकती झोपड़ियों के भीतर घुस गए। लोगों ने बताया कि लपटें इतनी तेज थीं कि पास खड़ा होना भी नामुमकिन था। इसके बावजूद विकास और शैलेंद्र ने साहस दिखाते हुए धुएं से भरी झोपड़ियों से करीब आधा दर्जन महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत कार्य के दौरान कई बार ऐसा लगा कि आग उन्हें आग घेर लेगी, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। लोगों का कहना है कि अगर ये दोनों युवक समय पर नहीं पहुंचते, तो आज गांव में मातम का मंजर कुछ और ही होता। इन्होंने अपनी जान की बाजी लगाकर हमारे बच्चों को बचाया है।