गुरवलिया बाजार। महाराष्ट्र, केरल, चेन्नई, गुजरात जैसे बड़े शहरों के युवा वैज्ञानिकों को कुशीनगर के अंतिम छोर पर बसे गंडक की शांति भा रही है। युवाओं का कहना है कि जब वह अपने शहर से फ्लाइट से यात्रा करते हुए गोरखपुर के लिए निकले थे तो बोर्डिंग करते समय चेकिंग के दौरान कैन सेट के लिए इलेक्ट्राॅनिक आइटम के कारण उन्हें गहनता से चेकिंग का सामना करना पड़ा।
बाद में उन्हें प्रतियोगिता के कागजात के बाद कैन सेट लाने की अनुमति मिली। हालांकि इसके बाद उनकी यात्रा सहज हो गई और वह जब गंडक की गोद में पहुंचे तो यहां की शांति, यहां की व्यवस्था से उन्हें काफी आनंद का अनुभव हो रहा है।
गंडक नदी के किनारे रकबा जंगली पट्टी में चल रहे मॉडल राकेट्री प्रतियोगिता में वैसे तो कर्नाटक, राजस्थान, तमिलनाडु, यूपी, दिल्ली, गुजरात, आंध्र प्रदेश सहित अनेक राज्यों के इंजीनियरिंग काॅलेजों से छात्र-छात्राएं प्रतियोगिता में भाग लेने आए हैं।
इसमें कुछ टीमों ने प्रतियोगिता में अपने प्रदर्शन को सफलता पूर्वक पूरा कर लिया है। वहीं जिनका प्रदर्शन बाकी है वह छात्र मंगलवार को अपने राॅकेटों की तैयार करने में लगे रहे। बेंगलुरु के बीएमएस इंजीनियरिंग काॅलेज के छात्र धनुष सालुंके व छात्रा सिया पाटिल ने बताया कि उनके साथ अन्य कई टीमें इस प्रतियोगिता में भाग लेने की तैयारी में हैं। उनकी कोशिश है कि वह भी सफल लांचिंग का हिस्सा बने।
गणपति बप्पा मोरया का जयघोष : एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी पुणे महाराष्ट्र के छात्रों की टीम द्वारा डिजाइन की गई केनसेट राकेट 12.40 बजे लांच किया गया। जिसकी लांचिंग सफल होने पर छात्रों ने गणपति बप्पा मोरया के जयघोष के साथ खुशी का इजहार किया।
छात्र स्लोक शर्मा व प्रथमेश फाटक सहित अन्य छात्रों ने बताया कि इस प्रतियोगिता के लिए उनकी टीम ने काफी मेहनत की थी।
पास के गांवों में नो मेंस लैंड घोषित किया गया : रकबा जंगली पट्टी में दूसरे दिन मंगलवार को मॉडल राकेट्री कैन सेट छात्र प्रतियोगिता को लेकर सुरक्षा कारणों से 11 बजे से अगल बगल के सभी गांवों को नो मेंस लैंड घोषित कर दिया गया था और जीरो पुल से पिपराघाट जाने वाली मार्ग को आवाजाही के लिए बंद कर दिया गया था। गंडक नदी के किनारे बसे तवकल टोला, दहारी टोला, नरवाजोत, देवनारायण टोला, उपाध्याय टोला सहित अन्य कई गांवों की आवाजाही का रूट डायवर्जन कर गोला घाट के रास्ते कर दिया गया था।