पडरौना। रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के लिए मायके जाने को निकली बहनों की भीड़ के आगे रोडवेज की व्यवस्था शुक्रवार को बेपटरी हो गई। सुबह से ही बस स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ उमड़ पड़ी। नौ बजे तक अधिकांश बसें यात्रियों से भरकर रवाना हो गईं। इसके बाद स्टेशन पर बसों का इंतजार कर रहे यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
घंटों बाद कोई बस पहुंचती तो उसमें सवार होने के लिए धक्का-मुक्की होने लगती। महिलाओं और बच्चों को भीड़ के बीच बस में जगह बनाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। सबसे अधिक परेशानी देवरिया जाने वाले यात्रियों के उठानी पड़ी, वहीं शाम पांच बजे के बाद बसाें के पहिए थम गए।यात्रियों को प्राइवेट वाहनों से यात्रा पूरी करनी पड़ी।
रक्षाबंधन के त्योहार को लेकर इस बार यात्रियों की संख्या बढ़ने का अनुमान पहले से था। बावजूद इसके सुबह के बाद बसों की उपलब्धता मांग के अनुरूप नहीं रही। स्टेशन पर मौजूद यात्री एक बस के आने के बाद दूसरी बस की राह देखते रहे। जिन यात्रियों को आसपास के कस्बों और गांवों तक जाना था, उन्हें भी काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। बस स्टेशन पर जैसे ही कोई बस पहुंचती, यात्रियों की भीड़ उसके दरवाजे की ओर दौड़ पड़ती। पहले बस में चढ़ने की होड़ में धक्का-मुक्की तक की नौबत आ जाती। सीट पाने के लिए लोग खिड़कियों और दरवाजों से बस में सवार होने की कोशिश करते दिखे।
महिलाओं के लिए अलग से कोई सुविधा नहीं होने के कारण उन्हें भी पुरुष यात्रियों की भीड़ के बीच बस में चढ़ना पड़ा। रक्षाबंधन पर मायके जाने वाली महिलाओं में सबसे ज्यादा बेचैनी नजर आई। कई महिलाएं हाथों में राखी और सामान लिए बस आने का इंतजार करती रहीं। कुछ महिलाओं के साथ छोटे बच्चे भी थे। बस देर से मिलने के कारण उन्हें बच्चों को संभालने के साथ सामान भी उठाए रखना पड़ा।
यात्रियों का कहना था कि त्योहार के दिन घर समय से पहुंचने की चिंता अलग थी और बस मिलने की परेशानी अलग। सुबह नौ बजे के बाद बस स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ लगातार बढ़ती गई। करीब 9:30 बजे पडरौना बस स्टेशन पर एक भी बस नहीं थी। बस के इंतजार में बस स्टेशन की गेट पर सैकड़ों की संख्या में महिलाएं खड़ी दिखीं।
दोपहर तक स्थिति यह हो गई कि स्टेशन परिसर में जगह-जगह यात्री बसों की प्रतीक्षा करते दिखाई दिए। बस आते ही कुछ ही मिनट में वह यात्रियों से भर जाती और रवाना हो जाती। इसके बाद पीछे छूटे यात्रियों को अगली बस का इंतजार करना पड़ता। रक्षाबंधन पर यात्रियों की संख्या सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी बढ़ गई। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों के घर जाने के लिए निकलीं। इसके अलावा नौकरी और पढ़ाई के सिलसिले में बाहर रहने वाले लोग भी त्योहार मनाने घर लौटे। इससे रोडवेज बसों पर दबाव बढ़ गया।
शाम पांच बजे के बाद निगम और अनुबंधित समेत सभी बसों के पहिए थम गए। इसके चलते गोरखपुर और देवरिया जाने वाले यात्रियों को प्राइवेट वाहनों से ही यात्रा करना पड़ा। बस स्टेशन में खड़ी गोरखपुर या पडरौना डिपो की बसों के चालक और परिचालक अपना फेरा पूरा करने की बात कहकर यात्रियों को सीधे मना कर दे रहे थे। वहीं बस स्टेशन पर खड़ी उन्नाव और कानपुर डिपो की बसों के चालक व परिचालक कसया, हाटा और गोरखपुर की सवारी नहीं बैठा रहे थे। वे केवल लंबी दूरी के यात्रियों को बस में बैठा रहे थे।
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गोरखपुर जाने के लिए बहन और भांजी के साथ बस पकड़ने आया हूं। बीते करीब एक घंटे से बस की प्रतिक्षा कर रहा हूं। शाम करीब 5:30 बजे उन्नाव डिपो की एक बस लगी तो उसमें बैठने के लिए गए, लेकिन चालक ने बाईपास के रास्ते लखनऊ की तरफ से जाने की बात कहकर उतार दिए हैं। अब मजबूरी में प्राइवेट वाहनों से ही गोरखपुर जाना पड़ेगा।
- गिरिजेश पांडेय, पडरौना।
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रक्षाबंधन के त्योहार पर घर आए थे। शनिवार को समय पर ड्यूटी पर पहुंच जाएं, इसलिए आज शाम को ही गोरखपुर के लिए निकाला हूं। लेकिन बस स्टेशन पर कोई बस नही है। जो बस लगी है उसके चालक व परिचालक बाईपास के रास्ते लखनऊ की तरफ से जाने की बात कहकर बस में बैठने नहीं दे रहे हैं।
- राकेश श्रीवास्तव, पडरौना।
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भाई को राखी बांधने मायके आई थी। शाम को गोरखपुर के लिए निकली हूं। कल बच्चों का स्कूल है इसलिए घर पहुंचना जरूरी है। बस स्टेशन पर खड़ी बस में गोरखपुर के यात्रियों को नहीं बैठाया जा रहा है। अब प्राइवेट वाहनों से ही यात्रा करनी पड़ेगी। - काजल देवी, गोरखपुर।
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गोरखपुर में किराए के मकान में रहकर बच्चों को पढ़ाती हूं। रक्षाबंधन पर घर आई थी। त्योहार मनाने के बाद पुन: गोरखपुर जाने के लिए बस स्टेशन आई लेकिन यहां बस नहीं मिल रही है। लग रहा है कि प्राइवेट वाहन से ही जाना पड़ेगा। -अनिता देवी, पडरौना।
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सुबह करीब पांच बजे से बस चालक और परिचालक बसों का संचालन कर रहे हैं। इसके चलते थक गए होंगे इसलिए वे नहीं जा रहे होंगे। उन्नाव और कानपुर डिपो के बस चालकों को कसया, हाटा समेत गोरखपुर तक लोकल यात्रियों को बैठाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं किए हैं तो इसकी शिकायत उनके डिपो के अधिकारियों से की जाएगी। -जयप्रकाश प्रधान, एआरएम