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Kushinagar News: टोकन ने एआरटीओ और जीएसटी टीम की उड़ाई नींद

Tue, 11 Nov 2025 01:47 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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कुशीनगर/हाटा। हाटा कोतवाली क्षेत्र के चर्चित सेठी ढाबा टोकन कांड में अब नए खुलासे सामने आने लगे हैं। जांच जैसे आगे बढ़ रही है, विभागीय मिलीभगत के संकेत साफ होते जा रहे हैं। राज्य कर विभाग की टीम को ढाबा संचालक के मोबाइल फोन और डायरी से मिली जानकारी ने पूरे सिस्टम में हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि इसमें कई ऐसे मोबाइल नंबर दर्ज हैं जो विभिन्न विभागों से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के हैं। मामले की जांच कर रही पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि आखिर किन अफसरों के संरक्षण में यह टोकन रैकेट इतने बड़े पैमाने पर चल रहा था।
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राज्य कर विभाग की तहरीर पर दर्ज मुकदमे के बाद से ही सेठी ढाबा का नेटवर्क धीरे-धीरे खुलता जा रहा है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे खेल में केवल एक ढाबा संचालक ही नहीं, बल्कि कई विभागों के अधिकारी और फील्ड कर्मचारी भी शामिल थे। आरोप है कि इन अधिकारियों की मौन सहमति के बदले में मोटी रकम नियमित रूप से दी जाती थी। बदले में टोकन वाले वाहनों की न तो कोई जांच होती थी, न ही कोई रोकटोक। हाईवे से गुजरने वाले ट्रक और बस चालकों के बीच सेठी ढाबा टोकन एक तरह से पासपोर्ट की तरह काम करता था। मुजहना हेतिमपुर टोल प्लाजा और कुशीनगर से देवरिया-गोरखपुर तक चलने वाले मार्ग पर यह टोकन इतना प्रभावी था कि आरटीओ, जीएसटी और पुलिस की जांच टीमें भी टोकन वाले वाहनों को बिना पूछताछ के जाने देती थीं। सूत्रों का कहना है कि ढाबा संचालक ने बकायदा एक पास सिस्टम तैयार किया था। टोकन की रकम चुकाने के बाद वाहन चालक निश्चिंत होकर पूरे रूट पर यात्रा करते थे। सिर्फ चार महीनों में सेठी ढाबा ने हाईवे पर ऐसा दबदबा बना लिया था। टोकन के नाम पर हर दिन लाखों रुपये की वसूली होती थी।
इस रकम का हिस्सा कहां जाता था, यही अब जांच का मुख्य बिंदु बन गया है। बताया जा रहा है कि ढाबा संचालक के पास से मिली डायरी में कई तिथियों के साथ भुगतान का ब्यौरा दर्ज है। कुछ के आगे आरटीओ, जीएसटी, टीम, थाना, सिपाही जैसे संकेत लिखे हैं, जिससे यह अंदेशा गहराता जा रहा है कि यह खेल ऊंचे स्तर तक फैला हुआ था। जांच की जद में वे अधिकारी भी हैं जो नियमित रूप से इस रूट पर जांच के नाम पर तैनात रहते थे।
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सूत्रों का दावा है कि जब प्रारंभिक पूछताछ में कुछ अधिकारियों के नाम सामने आए तो विभागीय स्तर पर हलचल मच गई। कुछ अधिकारियों ने अपने बचाव में बयान दर्ज कराए हैं, जबकि कुछ ने पूरे मामले से अनजान होने का दावा किया है। लेकिन यह सवाल अब भी कायम है कि अगर यह टोकन सिस्टम महीनों से चल रहा था तो जांच टीमें आंखें मूंदे क्यों रहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मुजहना हेतिम टोल प्लाजा पर रोज़ाना आरटीओ और राज्य कर विभाग की टीमें जांच के नाम पर तैनात रहती थीं, लेकिन आश्चर्य की बात यह थी कि टोकन वाले ट्रक कभी नहीं रोके जाते थे। वहीं जो चालक टोकन नहीं रखते थे, उनके वाहनों की कागजी जांच और चालान की नौबत तक आती थी।
यह भेदभाव लंबे समय से जारी था, जिसकी अब पुष्टि होते दिख रही है। लंबी दूरी की बसों के कुशीनगर जिले की सीमा लगातार हुई दुर्घटनाओं के बाद उनके अवैध संचालन पर लोगों की नजर गई। शुरुआती जांच में पता चला की लंबी दूरी की अधिकांश बसें बगैर वैध टैक्स और कागजातों के ही दिल्ली से लेकर बिहार तक फर्राटा भर रही थी। उच्च अधिकारियों ने जब हाईवे पर हो रहे इस खेल की जांच पर नजरे दौड़ाई तो जीएसटी और राज्य कर विभाग के तरफ से भी होने वाली जांचों से पर्दा उठा और पता चला कि हाईवे पर एक लंबा खेल जांच टीमों के नाम पर खेला जा रहा है।
गोपनीय जांच में कई वाहन चालकों ने खुलासा किया कि वे नियमित रूप से सेठी ढाबा से टोकन खरीदते थे। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ढाबा संचालक से बरामद मोबाइल में कुछ ऐसे नंबर मिले हैं जो आरटीओ और परिवहन विभाग से जुड़े कर्मचारियों के हैं। इन कॉल डिटेल्स की जांच कराई जा रही है। जल्द ही सीडीआर रिपोर्ट आने पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जुड़ सकती हैं। फिलहाल सेठी ढाबा तो खुला हुआ है, लेकिन पहले की तरह वहां रौनक नहीं है। दर्जनों की संख्या में लंबी दूरी की बसे खड़ी रहती थीं।
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