सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं होने से हजारों लोग परेशान
पडरौना। कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन की शुरुआत से ही कप्तानगंज-थावे रूट पर ट्रेनों का संचालन बंद है। इसके अलावा पडरौना से कप्तानगंज होते हुए गोरखपुर एवं पडरौना-तमकुहीरोड मार्ग सहित कई प्रमुख रास्तों पर रोडवेज की बसों का संचालन न होने से लोगों को परेशान होना पड़ रहा है।
चाहे यात्री हों या व्यवसायी, सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के अभाव में उन्हें कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। कप्तानगंज, खड्डा, पडरौना और तमकुहीराज तहसील क्षेत्र में कई ऐसे गांव हैं, जहां से जनपद मुख्यालय आने-जाने के लिए ट्रेन ही सबसे सुलभ और किफायती माध्यम है। ऐसे लोग जनपद मुख्यालय पर इलाज, सरकारी योजनाओं से संबंधित कार्य, अधिकारियों से अपनी समस्याएं बताने और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों से आने-जाने के लिए ट्रेन का सहारा लेते रहे हैं। लेकिन लॉकडाउन शुरू होने के बाद से अब तक ट्रेनों का संचालन बंद होने से उन लोगों की समस्याएं बढ़ गई हैं।
दुदही बाजार के व्यवसायी रवि कुमार बताते हैं कि दुदही से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में लोग पडरौना, थावे, कप्तानगंज एवं गोरखपुर अपनी विभिन्न जरूरतों से आते-जाते हैं। दुदही से थावे जाने के लिए ट्रेन का किराया 15 रुपये है। जबकि किराए के वाहनों से जाने में 200 रुपये खर्च हो जा रहे हैं। कई जगह सवारी बदलना पड़ता है। यही हाल दुदही से कप्तानगंज जाने में होता है। ट्रेनों का संचालन बंद होने से काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
रामकोला क्षेत्र के धोधरही गांव की निवासी कौशल्या देवी बताती हैं कि प्रतिमाह इलाज के लिए गोरखपुर जाना पड़ता है। वह बताती हैं कि गोरखपुर के लिए बस का पिपराइच होकर प्रति व्यक्ति किराया 80 रुपये हैं, जबकि ट्रेन से 15 रुपये है। पडरौना के लिए टैक्सी से 50 रुपये और ट्रेन से 10 रुपये किराया है। लॉकडाउन के समय से गोरखपुर इलाज के लिए जाने पर किराया अधिक देना पड़ता है।
पडरौना के सर्राफा व्यवसायी संजीव कुमार बताते हैं कि ट्रेनों से आवागमन का माध्यम था तो दूर-दराज से ग्राहक आते थे। क्योंकि ट्रेन का किराया कम होता है। खुद भी व्यवसाय के सिलसिले में ट्रेनों से बाहर जाया करते थे, लेकिन अब बाहर जाना कम हो गया है। दूर के ग्राहक भी बड़े कम आते हैं। इसका असर व्यवसाय पर पड़ता है। पडरौना के छात्र गोल्डेन कुशवाहा बताते हैं कि ट्रेनों का संचालन न होने से उनके सगे-संबंधियों को आने-जाने में परेशानी होती है। पडरौना से कप्तानगंज होते हुए गोरखपुर अथवा खड्डा रोड पर तथा तमकुहीरोड मार्ग पर रोडवेज बसों का संचालन भी नहीं होता है। इससे आवागमन में असुविधा होती है।
रोडवेज के एआरएम बिंदू प्रसाद का कहना है कि यात्रियों की तुलना में अभी बसों की संख्या कम है। जिले में संचालित बसों में यात्रियों की संख्या काफी अधिक होती है। किसी तरह यात्रियों को बेहतर यात्रा की सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। अभी कप्तानगंज-थावे रूट पर बस संचालन की व्यवस्था नहीं है और न ही आगे कोई व्यवस्था करने में निगम सक्षम है।