पडरौना (कुशीनगर)। भाषिक विविधता के बावजूद देश में राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने और एकता के सूत्र को तलाशने के उद्देश्य से भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के केंद्रीय हिंदी निदेशालय तथा बुद्ध स्नातकोत्तर महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 12 और 13 मार्च को राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। संगोष्ठी को कई सत्रों में विभाजित कर भाषा और समाज से जुड़े विविध विषयों पर विमर्श किया जाएगा।
संगोष्ठी का उद्घाटन केंद्रीय हिंदी संस्थान के निदेशक प्रो. हितेंद्र मिश्र करेंगे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता शिक्षा मंत्रालय के केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल के उपाध्यक्ष और सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे करेंगे। दिल्ली विश्वविद्यालय के भाषा विज्ञान विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद्र शर्मा संगोष्ठी का बीज वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।
संगोष्ठी के संयोजक प्रो. गौरव तिवारी ने बताया कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों से विद्वान इसमें भाग लेंगे। आंध्र प्रदेश से प्रो. आर.एस. सर्राजू, बेंगलुरु से डॉ. ऊषा रानी राव, पोर्ट ब्लेयर (अंडमान) में हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. व्यास मणि त्रिपाठी, गोरखपुर विश्वविद्यालय से प्रो. विमलेश मिश्र और प्रो. प्रत्यूष दुबे, सिद्धार्थनगर विश्वविद्यालय से प्रो. हरीश शर्मा, डॉ. जय सिंह यादव और डॉ. रेणु त्रिपाठी, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से डॉ. अचला त्रिपाठी तथा कानपुर विश्वविद्यालय से डॉ. रमाकांत राय अपने विचार रखेंगे।
इसके अलावा गोरखपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध महाविद्यालयों के डॉ. शत्रुघ्न सिंह, डॉ. प्रद्योत सिंह, डॉ. विजय निषाद सहित जनपद के विभिन्न महाविद्यालयों के साहित्य आचार्य भी संगोष्ठी में सहभागिता करेंगे।
दो दिवसीय संगोष्ठी को छह सत्रों में विभाजित किया गया है। इन सत्रों में भारतीय भाषा परिवार की अवधारणा, वैश्विक स्तर पर भाषा संबंधी अवधारणाएं, बोलियों के अंतर्संबंध, भाषा और बोली की अवधारणा, भाषा और समाज तथा भारतीय भाषा परिवार की आवश्यकता जैसे विषयों पर विचार मंथन किया जाएगा।