तिघरा। विकास खंड बघौली के कोल्हुआ लकड़ा उतरावल में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में कथावाचक डॉ. धरणीधर ने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जिनमें अहंकार न हो और भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करे। उन्होंने जोर दिया कि जब भक्त सच्चे मन से भगवान को पुकारता है, तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा और कल्याण करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा केवल एक धार्मिक कथा नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन को सही दिशा देने वाली अमूल्य शिक्षाओं का भंडार है।
उन्होंने कहा कि कथा के माध्यम से मनुष्य को धर्म, प्रेम, सेवा और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण और देवी रुक्मिणी के प्रसंग का वर्णन किया। उन्होंने इसे प्रेम, भक्ति और समर्पण की चरम अभिव्यक्ति बताते हुए कहा कि जिस प्रकार रुक्मिणी ने अपना सर्वस्व भगवान को अर्पित किया, उसी प्रकार प्रत्येक भक्त को अपने जीवन में श्रद्धा और समर्पण की भावना रखनी चाहिए। कथा के दौरान रुक्मिणी विवाह की सुंदर झांकी निकाली गई। कथा में मुख्य यजमान राधेश्याम राय, लक्ष्मी राय, शंभुनाथ राय, दुर्गेश चंद्र पाण्डेय आदि मौजूद रहे।