फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kushinagar News: मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली बंगलूरू में संभावना अपार...क्यों देश छोड़ें, यही करें रोजगार

Thu, 26 Dec 2024 06:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
विज्ञापन
विज्ञापन
पडरौना। एजेंट के जरिए विदेश में फंसकर वापस लौटे युवाओं का दर्द उनकी बातों में साफ झलक रहा है। ज्यादा पैसे कमाने की आस में विदेश गए इन युवाओं को न तो उम्मीद के मुताबिक पैसा मिला और न ही विदेश जाने पर उनकी जिंदगी में ही कोई बदलाव आया। अलबत्ता उन्हें तमाम उलझनों के बीच काम के दबाव में लंबे समय तक विदेश में फंसकर शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। लोगों का कहना है कि बाहर जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली बंगलूरू आदि शहर विदेश से कम नहीं हैं, जहां लोगों के लिए अच्छे पैसों में रोजगार के ढेरों अवसर मौजूद हैं।
विज्ञापन

विदेश से लौटकर आए युवाओं का मानना है कि किसी भी ट्रैवल एजेंसी के जरिए विदेश जाने की कोशिश न करें, बल्कि जो एजेंसियां मान्यता प्राप्त हैं और लोगों को विदेश भेजने के बाद उनकी कोई शिकायत नहीं मिली है, उसके जरिए ही विदेश जाने की कोशिश करें। युवाओं का मानना है कि अगर बहुत जरूरी न हो तो तो अपनी मेहनत के बलबूते देश में ही छोटे स्वरोजगार या नौकरी के जरिए खुशियां ढूंढ़े, न कि विदेश जाने के चक्कर में अपनी जमा पूंजी को बर्बाद करें।

सात समुंदर पार खाड़ी देशों में जाकर कमाने वाले अच्छी नजर से देखे जाते थे। तब सऊदी, दुबई आदि जगहों का क्रेज देखा जाता था। इसके बाद लोग विदेश जाने के लिए भी किसी भी तरह के कदम उठाने के लिए तैयार होने लगे। टूरिस्ट वीजा हो या गलत एजेंटों के फेर में फंसना लोग जल्द विदेशों में रोजगार पाने के चक्कर में रुपये तक खर्च करने लग गए। औसतन दस लोगों में पांच लोग टूरिस्ट वीजा पर जाकर नौकरी करने में सफल हो जाते थे तो कुछ फंस जाते थे। वहां पकड़े जाने के बाद और जुर्माना देना पड़ता है। लंबे समय तक फंसे भी रहते थे। अब हालात यह हो गई है कि जो ऑफर लेटर एजेंट देते हैं, वहां जाकर न तो वहां वह काम मिलता है और न ही बताई गई सैलरी। दो जून की रोटी के लिए लाले पड़ जाते थे। अधिक दबाव बनाने पर यहां से जाने वाले लोगों को चरवाहा, मजदूरी, ड्राइवर आदि जगहों पर कम रुपये पे जबरन काम कराया जाने लगा। इस बीच मालिक उनके वीजा व पासपोर्ट रखकर उन्हें फंसाए रहते थे।
विज्ञापन

अब हालात कुछ बदले हैं और किसी भी तरह वह प्रवासी मदद फाउंडेशन के संपर्क में आकर सोशल मीडिया से गुहार लगाकर देश वापस लौटने लगे हैं। फाउंडेशन की मदद से विदेश मंत्रालय उन्हें वापस लाता है। कुछ इस तरह ही पिछले दिनों प्रवासी मदद फाउंडेशन के अविनाश कुमार पिंटू और उपाध्यक्ष पिंटू पांडेय की पहल पर विदेश से आए युवकों ने कभी विदेश न जाने की बात दोहराई है। उनका कहना है कि गांव में स्वरोजगार या अपने ही देश में मुंबई, हैदराबाद, दिल्ली आदि शहर मिनी विदेश से कम नहीं, जहां उन्हें नौकरी मिल जाएगी।

एसपी संतोष कुमार मिश्रा ने बताया कि विदेशों में रोजगार देने के नाम पर ठगी करने वालों पूर्व में आए मामलों में मुकदमा पंजीकृत किया गया है, जिसकी विवेचना प्रचलित है। इनके खिलाफ बीच में गैंगस्टर की कार्रवाई भी की गई थी।
-

केस नंबर एक
विदेश गया तो गड्ढा खुदवाने लगे..आवाज उठाई तो धमकी भी मिली
-कुशीनगर निवासी प्रिंस महतो घर की माली हालत सुधारने के लिए एजेंट के झांसे में आकर दुबई के एक कंपनी में पाइप फिटर के काम के लिए गए थे। दुबई पहुंचने के बाद उससे गड्ढा खुदवाया जाने लगा। काम को लेकर परेशान प्रिंस अपने एजेंट से संपर्क किया और वापसी की बात कही तो एजेंट ने धमकी दी। जैसे-तैसे प्रिंस ने कुछ माह काटे। बाद में जानकारी हुई तो सोशल मीडिया के माध्यम से संस्था प्रवासी मदद फाउंडेशन से संपर्क किया। इसके बाद उसकी वापसी हुई। प्रिंस कहता है कि कम उम्र में अगर बड़े सपने सजाकर आप विदेश जाना चाहते हैं तो वैध ट्रैवल एजेंसी से संपर्क कर जाएं। वह अपनी खुद की किराना की दुकान चला रहे हैं।

केस नंबर दो

दुबई में फंसे थे अफजल...बना दिया गया था बंधक

-पिछले दिनों गाजीपुर निवासी अफजल की स्वदेश वापसी हुई। घर की माली हालत सुधारने के लिए दुबई कमाने कुछ महीने पहले वह गया था। वहां पहुंचने के बाद जिस काम का उल्लेख ऑफर लेटर में किया गया था। न तो काम मिला और न ही उसके हिसाब से वेतन। वेतन और हक के पक्ष में आवाज उठाने पर कंपनी की ओर से उसे बंधक बना दिया गया।इसके बाद परिजनों ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रवासी मदद फाउंडेशन संस्था के सदस्यों से संपर्क कर पीड़ा सुनाई। संस्था के सदस्यों ने सभी आवश्यक कागजात तैयार कर राष्ट्रीय महासचिव विजय मद्धेशिया को दिया। इसके बाद भारतीय राजदूतावास और विदेश मंत्रालय के पहल पर अफजल की वापसी हुई। अफजल का मानना है कि अपना स्वदेश ही सबसे उत्तम है। वह इन दिनों हैदराबाद की एक कंपनी में सुपरवाइजर का काम कर रहे हैं और खुशहाल हैं।

.दुलही जाने वाला संपर्क मार्ग। संवाद

.दुलही जाने वाला संपर्क मार्ग। संवाद

.दुलही जाने वाला संपर्क मार्ग। संवाद

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें