सोशल मीडिया और डिजाइनर थालियों ने बदला अंदाज
पडरौना। समय के साथ त्योहार मनाने का अंदाज भी बदल रहा है। कभी करवा चौथ का पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों, घर की महिलाओं के सामूहिक पूजन और सास-ननद से सीखी जाने वाली परंपराओं तक सीमित रहता था लेकिन अब इसमें आधुनिकता की चमक भी साफ तौर पर दिखाई देने लगी है।
डिजाइनर छलनी और पूजा की थाली से लेकर सजी-धजी पूजा सामग्री, आकर्षक परिधान, मेहंदी और सोशल मीडिया पर तस्वीरें साझा करने को तवज्जो देने से पर्व पर आधुनिकता की छाप साफ तौर पर नजर आ रही है। हालांकि, इन बदलावों के बीच पति की लंबी उम्र की कामना और दांपत्य जीवन की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला व्रत आज भी अपनी मूल भावना के साथ कायम है।
29 अक्तूबर को मनाए जाने वाले करवा चौथ को लेकर महिलाओं में तैयारियां शुरू हो गई है। बाजारों में पूजा सामग्री, करवा, छलनी, साज-शृंगार के सामान और पारंपरिक परिधानों की खरीदारी का माहौल बनने लगा है। नई पीढ़ी जहां पर्व को खास अंदाज में मनाने की तैयारी कर रही है, वहीं बुजुर्ग महिलाओं के लिए करवा चौथ पुराने दिनों की यादों को ताजा करने का अवसर है।
करीब 40 वर्ष पहले करवा चौथ मनाने का तरीका आज से काफी अलग था। उस समय महिलाएं घरों में उपलब्ध साधनों से पूजा की तैयारी करती थीं। परिवार की बड़ी-बुजुर्ग महिलाएं व्रत की कथा सुनाती थीं और परंपराओं के अनुसार पूजन कराया जाता था।
- रूक्मिणी देवी।
करीब 30 से 40 वर्ष पहले की बात करें तो साज-शृंगार के सीमित साधनों के बावजूद पर्व को लेकर उत्साह कम नहीं होता था। कई परिवारों में महिलाएं एक साथ बैठकर कथा सुनतीं और चांद निकलने का इंतजार करती थीं।
- सावित्री देवी।
करवा चौथ के आयोजन में कई नए रंग जुड़ गए हैं। बाजार में पूजा की थालियों और करवा के कई डिजाइन उपलब्ध हैं। अपनी पसंद के कपड़े, आभूषण और मेहंदी के डिजाइन चुनकर त्योहार को खास बनाने लगी हूं।
- नंदनी मद्धेशिया।
इंटरनेट के दौर में अब डिजिटल माध्यमों ने व्रत की कथा, पूजन विधि और चांद निकलने के समय की जानकारी हासिल करना आसान है। लेकिन घर के बुजुर्ग पंचांग के अनुसार ही व्रत करने के लिए कह रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में ही करवा चौथ व्रत करूंगी।
- प्रियंका देवी।