बाघ के हमले से बचे राकेश और दुर्गेश। संवाद
खड्डा। कोपजंगल गांव के छपिया टोला के रहने वाले सगे भाइयों राकेश और दुर्गेश के मन से बाघ का खौफ नहीं निकल रहा है। युवक यह सोचकर सहमे हैं कि अगर बकरा नहीं होता तो वे बाघ का शिकार बन गए होते। अभी भी कोई हरकत हो रही है तो सहम जा रहे हैं। रात को लाठी ठंडे के साथ सो रहे हैं, लेकिन जैसी चाहिए वैसी नींद डर की वजह से नहीं आ रही है।
अंदाजा नहीं था कि बाघ झोपीड़ी में आ जाएगा। बाघ के हमले से बचे सगे भाईयों ने यह बात बताई। खड्डा थाना क्षेत्र के ग्राम कोपजंगल के टोला छपिया निवासी राकेश, दुर्गेश बताते हैं कि रोज की तरह चार दिन पूर्व अर्धनिर्मित कच्चे घर में सो रहे थे, पास ही एक बकरा व दो बकरी बंधी थीं। दुर्गेश रात में मोबाइल देखते हुए झपकी ले रहा था और राकेश सो गया था।
तभी बगल में कुछ हरकत हुई व बकरियां बोलने लगीं। अचानक आंख खुली तो बाघ बकरे को जबड़े में दबाए हुए था, कुछ पल का यह दृश्य देख भय व्याप्त हो गया और बकरे को बचाने की हिम्मत नहीं पड़ी। अगर बकरा नहीं होता तो बाघ जरूर हम दोनों भाइयों पर हमला कर देता। उसी रात से बाघ का भय आज भी सता रहा है।
शाम ढलने के बाद घर से निकलने पर लाठी व टार्च लेकर निकल रहे हैं। यही हाल इस गांव के मुलायम यादव का है। दिन के समय जब वे अपने मकान के पीछे गिरे कपड़ा लाने पहुंचे तभी बाघ से आमना-सामना हो गया। गनीमत रहा की उसने हमला नहीं किया और आज वे सुरक्षित हैं लेकिन वह मंजर दिमाग में घर कर गया है।