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Kushinagar News: समाज के चरित्र निर्माण में गुरु की भूमिका महत्वपूर्ण

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तमकुहीरोड। शिक्षक एवं गुरु समाज के चरित्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं। इन्हें शिक्षक दिवस तक ही सीमित रखना एक भूल है। यह यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जो माता-पिता से शुरू होकर शिक्षक, आचार्य व गुरु तक चलती रहती है। जिस देश में यह तीनों शक्तियां एकत्र होकर समाज का निर्माण करने में जुट जाएं, तो उस देश को विश्व गुरु बनने से कोई रोक नही सकता।
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ये बातें सद्गुरु रितेश्वर ने कहीं। वे रविवार को सेवरही के किसान पीजी काॅलेज में दिनकर विचार मंच की ओर से शिक्षक दिवस पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही वह व्यक्ति है, जो अपने शिष्य की सफलता पर सबसे ज्यादा खुश होता है। उन्होंने लोगों से भेदभाव खत्म कर राष्ट्र की शक्ति बढ़ाने की सलाह दी। भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि भारत गुरु व शिष्य परंपरा की जननी है। यहां सदियों से गुरु अपने शिष्यों के संरक्षक रहे हैं। आज के परिवेश में भी वह परंपरा हमारी प्रेरणा का स्रोत है। कार्यक्रम से पहले पूर्व सांसद डाॅ. रमापति राम त्रिपाठी, आयोजक डाॅ. विजय कुमार राय, ब्लाॅक प्रमुख तमकुही डाॅ. अनुराधा राय, पूर्व ब्लाॅक प्रमुख डाॅ. वशिष्ठ राय उर्फ गुड्डू राय, भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गेश राय, धनंजय तिवारी, प्रेमचंद्र मिश्र ने अतिथियों का स्वागत किया। संगोष्ठी के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
इस दौरान प्रधानाचार्य सुनील कुमार मिश्र, प्रहलाद केशरी, जितेंद्र राय, आदित्य जायसवाल, जगदीश जायसवाल, मदन किशोर शाही, पप्पू शाही, बृजभूषण मिश्र, रमेश ब्याहुत, शिवजी राय, अमरचंद्र जायसवाल, श्रीकांत मिश्र, राजेश त्रिपाठी, गोविंद नारायण सिंह आदि मौजूद रहे।
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