पडरौना। बच्चों में ऑटिज्म की समस्या बढ़ रही है। अस्पताल में हर हफ्ते ऑटिज्म पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। इनमें 80 फीसदी मरीज शहरी क्षेत्र के हैं। कुछ माह पहले तक महीने में एक या दो मरीज ही आते थे। ऑटिज्म बच्चों में मानसिक विकास से जुड़ी बीमारी है। इससे पीड़ित बच्चे को बातचीत करने, पढ़ने-लिखने और समाज में मेलजोल बनाने में परेशानी होती है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनवर ने बताया कि बताया कि जब बच्चे पैदा होते हैं तो सभी एक जैसा व्यवहार करते हैं। डेढ़ साल के बाद जब बच्चे का विकास होता है तो ऑटिज्म के लक्षण नजर आने लगते हैं। इसके प्रमुख लक्षण में बच्चों में सामाजिक कम्युनिकेशन का कम होना है। ऐसे बच्चों में बातचीत की प्रवृत्ति कम होगी या नहीं होगी। एक ही काम और व्यवहार को बच्चा बार-बार करता है। इससे पीड़ित बच्चे जिद्दी और चिड़चिड़े होते हैं। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों की मेमोरी स्ट्रांग होती है। इनको बिच्छु, सांप आदि से डर नहीं लगता है। अस्पताल में आने वाले ऐसे बच्चों का इलाज किया जा रहा है।
इलाज से सामान्य जीवन जी सकता है मरीज
शुरुआत में बीमारी का पता चलते ही सही उपचार मिलने पर मरीज सामान्य जीवन जी सकता है। ऐसे मरीजों की सेंसरी इंट्रीग्रेशन थेरपी, स्पीच थेरेपी, प्ले थेरेपी और सोशल कम्यूनिकेशन थेरेपी की जाती है। यदि मस्तिष्क का विकास एवरेज है तो इलाज से काफी हद तक बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है।