खड्डा। गंडक नदी का जलस्तर घटने-बढ़ने के बावजूद छितौनी तटबंध के स्पर ए पर शुक्रवार को भी नदी का दबाव बना रहा। नदी की धारा से क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित करने के लिए बाढ़ खंड की टीम बचाव कार्य में जुटी रही। स्थिति का जायजा लेने बाढ़ खंड के अधीक्षण अभियंता जयप्रकाश सिंह और अधिशासी अभियंता महेश सिंह मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
मदनपुर सुकरौली और सिसई दधीच गांव के पास तटबंध के किमी 4/5 के बीच स्थित स्पर ए के क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत एसडीओ संजय कुमार गौड़ के नेतृत्व में कराई जा रही है। नदी के दबाव को कम करने के लिए तार की जाली यानी कैरेट में बड़े-बड़े पत्थर डालकर सुरक्षा लेयर तैयार की जा रही है। बाढ़ खंड की टीम लगातार मौके पर निगरानी बनाए हुए है।नदी के निशाने पर आया पुराना पीपल का पेड़ फिलहाल सुरक्षित है, लेकिन उसके चबूतरे में दरार पड़ गई है। इससे पेड़ के कभी भी गिरने की आशंका है।
बाढ़ खंड के अधिकारियों का कहना है कि मुख्य तटबंध को फिलहाल किसी तरह का खतरा नहीं है। शुक्रवार सुबह आठ बजे से दोपहर 12 बजे तक गंडक नदी का डिस्चार्ज 88,300 क्यूसेक रहा। शाम चार बजे तक यह बढ़कर 1.14 लाख क्यूसेक हो गया। भैसहा गेज स्थल पर शाम के समय नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 12 सेंटीमीटर नीचे 94.88 मीटर दर्ज किया गया। एसडीओ संजय कुमार गौड़ ने बताया कि स्पर ए पर बचाव कार्य लगातार कराया जा रहा है। स्थिति नियंत्रण में है और मुख्य तटबंध को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
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रात में धंस जा रहे जीओ बैग, तटवर्ती गांव वालों की बढ़ी बेचैनी
-एपी बंधे के ठोकरों पर दबाव
तमकुहीरोड। एपी बांध के किमी 10.518 पर स्थित ठोकर के अप स्ट्रीम में कटान थम नहीं रहा है। दिन में कटान रोकने के लिए लगाए जा रहे जीओ बैग रात में नदी की धारा में धंस जा रहे हैं। इसके चलते पिछले चार दिनों से ठोकर पर लगातार खतरा बना हुआ है। कटान रोकने और खतरे को टालने के लिए अभियंताओं की टीम लगातार चौथे दिन भी मौके पर डटी रही। शुक्रवार को भी बचाव कार्य चलता रहा।
नदी में अचानक बैकरोलिंग शुरू होने से ठोकर ठोकर के करीब 40 मीटर हिस्से पर कटान का खतरा बना हुआ है। बांध के किनारे बोई गई गन्ने की फसल भी कटान की चपेट में आ रही है।
क्षेत्र के दीनानाथ सिंह, कैलाश सिंह, प्रहलाद राम, गुड्डू कुमार और गौतम सिंह आदि का कहना है कि पिछले दो वर्षों से क्षेत्र में बाढ़ बचाव के नाम पर कोई ठोस कार्य नहीं कराया गया है। इससे बांध और ठोकरों की स्थिति जर्जर हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि अभी बरसात का काफी समय बाकी है। ऐसे में यदि कटान रोकने के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए और नदी का डिस्चार्ज दोबारा बढ़ा तो ठोकर के साथ आसपास के गांवों की सुरक्षा पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दुबे, जेई सुनील यादव और जेई अमर श्रीवास्तव समेत अन्य अभियंता मौके पर बचाव कार्य में जुटे हैं। मिट्टी से भरे जीओ बैग लगाकर कटान रोकने और खतरे को टालने का प्रयास किया जा रहा है। बाढ़ खंड सेवरही के एसडीओ दीपरतन सिंह ने बताया कि नदी का जलस्तर कम होने पर ठोकरों पर दबाव बढ़ा है। कटान रोकने के लिए बचाव कार्य लगातार जारी है और रात में भी तटबंधों की निगरानी की जा रही है।