तमकुहीराज। कुशीनगर जिले के रास्ते होने वाली पशु तस्करी पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए पुलिस अभियान चलाकर कार्रवाई करने का दावा तो कर रही है, लेकिन इसका असर नहीं दिख रहा है। पुलिस ने एक साल में मुठभेड़ के दौरान खूब गोलियां तड़तड़ाई हैं। बावजूद इसके पशु तस्करी पर रोक नहीं लग पा रही है। हाईवे के रास्ते कुशीनगर के कई थानों को पार करा तस्कर बिहार तक पशुओं की खेप पहुंचा रहे हैं। सफेदपोशों के संरक्षण में जिले से होकर बिहार के तकिया टोले तक पशुओं की खेप भी पहुंच रही है। सूत्रों का कहना है कि हाईवे के थानों व चौकियों के कुछ पुलिसकर्मियों की मिलीभगत से तस्कर पशुओं की खेप लेकर निकल जा रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि पशु तस्करी के धंधे से जुड़े इलाके के कुछ सफेदपोश पुलिस की मिलीभगत से जिले के रास्ते पशुओं की तस्करी करा रहे हैं। पशु लदे वाहनों को सुरक्षित बिहार के तकिया टोला तक पहुंचाने में भी सफेदपोशों का संरक्षण है। ठिकाने तक पशुओं की खेप पहुंचने के बाद पुलिसकर्मियों को हिस्सेदारी भी दी जाती है।
जब किसी मामले में पुलिस की किरकिरी होती है तो गोपनीय टीमें भी कुछ मार्गों पर गुजर रहे वाहनों की जांच करती हैं, लेकिन धंधे से जुड़े सफेदपोशों की विभागीय स्तर पर पकड़ इतनी मजबूत है कि जांच टीम के पहुंचने से घंटों पहले इसकी सूचना लीक हो जाती है और धंधेबाज सतर्क हो जाते हैं।
पशु तस्करों के लिए हाईवे के अलावा सीमावर्ती इलाके के ग्रामीण मार्गों में बनवरिया-परसौनी, डिबनी-बिहार, हाईवे से मंझरिया-रामपुर, लतवा-कोटवा, सरया-जीरो आरडी बिहार, लतवा-लतवाजीत, छपरा अहिरौली-सरया, टड़वा-खुदरा, नैनुपहरू-बिहार, सलेमगढ़-बहादुरपुर, सलेमगढ़-मुकुंदपुर, सलेमगढ़-हफुआ सेफ जोन है।
पुलिस सक्रियता के दावों के बावजूद पशु लदे वाहन आसानी से बिहार प्रांत में प्रवेश कर जाते है। हालांकि, पुलिस ने पशु तस्करी रोकने के लिए प्रयास भी किए हैं और खूब मुठभेड़ भी हुई है। पुलिस ने पशु लदे वाहन बिना तस्करों के बरामद भी किए हैं। ऐसे मामलों में यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आखिरकार पुलिस की मजबूत घेराबंदी के बीच तस्कर आसानी से कैसे फरार होने में सफल हो जाते हैं।ा