मथौली। रीता भले ही सौतेली मां थी, लेकिन सुनील का चार साल की उम्र से ही अच्छी परवरिश कर दुनिया दिखाई। उसकी धूप धाम से बेटे की तरह शादी किया। सुनील और इसके पिता के बीच अक्सर कहासुनी तो होती थी। मां के अधिकार से सुनील को रीता भी डांटती थी। लेकिन यह उम्मीद नहीं था कि सुनील पल भर में अपनी मां की बेरहमी से मौत के घाट उतार देगा। हत्या के बाद किचन में चूल्हे का धुंआ निकलने के लिए बनी चिमनी में उसकी लाश को ठूस दिया था। हत्या का थोड़ा भी अफसोस उसके चेहरे पर नहीं दिख रहा था। जब तक पुलिस थी तब तक उसके दरवाजे पर भीड़ रही। इसके बाद उधर से गुजरने वाले गांव के लोग मकान की ओर देख मुंह फेरते नजर आए।
हाटा कोतवाली क्षेत्र के गांव परसौनी निवासी 60 वर्षीय मिश्री प्रजापति उर्फ गोबरी का विवाह लगभग 40 वर्ष पहले कलावती देवी से हुआ था। मिश्री ने बताया कि सुनील जब चार साल का था तो कलावती छोड़कर बेटियों को लेकर चली गई। बेटे की परवरिश में दिक्कत होने पर रीता के साथ शादी की। रीता बेटे की तरह सुनील का पालन-पोषण किया। कभी उसको पराया नहीं समझा। लेकिन, सुनील का व्यवहार शादी के बाद बदल गया। विदेश कमाने के बावजूद वह कोई मदद नहीं करता था। इसका भी हम लोगों को मलाल नहीं था। जिंदा रहते हुए जमीन बैनामा कराने के लिए और रीता को हिस्सा नहीं देने के लिए अक्सर दबाव बनाता था। इसको लेकर कई बार उससे कहासुनी भी हो चुकी थी। इसलिए दस कट्ठा जमीन रीता के नाम से बैनामा कर दिया। बाकी जमीन तो मरने के बाद इसी की होती लेकिन, सुनील ऐसा करेगा सपनों में भी हमने नहीं सोचा था। सुनील और इसकी पत्नी अनीता की करतूत को गांव वाले कोसते रहे। सुनील ने हत्या के बाद शव को चूल्हे की चिमनी में ठूंस दिया था। घर के अंदर लोग गए तो लाश कहीं नहीं दिखी। खून के छींटे को देखते हुए लोग किचन की ओर गए तो लाश देख पांव तले जमीन खिसक गई। लेकिन सुनील को मां की हत्या पर अफसोस नहीं था।
नीरज की बिगड़ी तबीयत, भेजा गया अस्पताल
-मां की हत्या के बाद अशोक मकान के दरवाजे का ताला बंद कर दिया था और पत्नी अनीता, बेटा 12 वर्षीय सूरज और नौ वर्षीय नीरज के साथ बैठा था। लू की वजह से नीरज की तबीयत जब पुलिस पहुंची तो बिगड़ गई। वह उल्टी करने लगा। पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर उसके मामा और बड़े भाई सूरज के साथ मेडिकल कॉलेज भेजा।