पडरौना। यह वर्ष भारतीय राजनीति के इतिहास में सुनहरे अध्याय की शुरुआत कर रहा है। 2026 मातृ शक्ति के वर्षों का संघर्ष लोक साधना की सिद्धि का वर्ष है। इसको मोदी सरकार ने दृष्टि दी है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम न सिर्फ महिलाओं को अधिकार देगा, बल्कि देश की नियति भी बदल देगा।
ये बातें उदित नारायण स्नातकोत्तर महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर ममता मणि त्रिपाठी ने कहीं। वे मंगलवार को महाविद्यालय में पत्रकारों से बात कर रहीं थी। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 27 वर्षों तक चली बहस के बाद भाजपा सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति की देन है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम प्रभावी होने से महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व से समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं के मुद्दों के प्रति ग्रहणशील होकर वह रोल मॉडल की भूमिका का निर्वहन करेंगी। उन्होंने कहा कि महिलाएं मूक मतदाता होने की तुलना में अब सक्रिय राजनीति में भागीदार बन गई हैं, जो जमीनी स्तर पर लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का सकारात्मक परिणाम यह होगा कि सक्रिय राजनीति में महिलाओं की सहभागिता और मजबूती से बढ़ेगी और उनकी दशा और दिशा में भी परिवर्तन होगा। इससे महिलाओं का नेतृत्व, समावेशी शासन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को पूरा करने में मदद मिलेगी।