पडरौना (कुशीनगर)। हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिमपुर टोल प्लाजा के पास संचालित सेठी ढाबा से लग्जरी बसों और ओवरलोड ट्रकों को चालान का भय दिखाकर अवैध वसूली के मामले में जांच तेज हो गई है। इसमें अब पुलिस की जांच में गोरखपुर के एआरटीओ और जीएसटी के सचल दल की टीम के दो चालकों का नाम सामने आया है। मोबाइल से मिली लोकेशन और कॉल डिटेल के माध्यम से पुलिस ने दोनों चालकों के बारे में पता लगाया है।
इसके पूर्व मामले में कुशीनगर के परिवहन विभाग के पीटीओ के चालक और ढाबा संचालक समेत चार लोगों को पुलिस जेल भिजवा चुकी है। जांच में चालकों को शह देने वाले जिम्मेदार भी जांच के घेरे में आए हैं, बहुत जल्द पुलिस उन लोगोंं पर भी शिकंजा कसने की तैयारी में है।
हाईवे के हाटा कोतवाली के हेतिमपुर के पास संचालित सेठी ढाबा से अवैध परिवहन वसूली का खेल लंबे समय से चल रहा था। अफसरों की छापेमारी के बाद इसका भंडाफोड़ पिछले साल नवंबर में हुआ था। हाईवे पर सक्रिय गैंग का संचालन मेरठ का रहने वाला ढाबा मालिक सुनील कुमार सिंह कर रहा था। राज्यकर विभाग के सचल दस्ते के प्रभारी अंबरीश सिंह की तहरीर पर ढाबा मालिक समेत तीन लोगों पर प्राथमिकी दर्ज हुई थी।
मामले के शुरुआती दौर में पता चला कि अवैध परिवहन करने वालों को राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की लोकेशन की जानकारी सुनील देता था। इससे टैक्स चोरी करने वाले वाहन आसानी से निकल जाते थे। छापेमारी के दौरान पुलिस के हाथ ढाबा संचालक के मोबाइल और एक डायरी लगी थी। इसमें कई लोगों का नाम व मोबाइल नंबर मिला था।
पुलिस की जांच में कुशीनगर के पीटीओ के चालक की संलिप्तता मिली। पुलिस उसे जेल भेज चुकी है। अब गोरखपुर के एआरटीओ, जीएसटी के सचल दल की टीम के दो चालकों का नाम सामने आया है। पुलिस दोनों की तलाश तेज कर दी है। दोनों को पुलिस जल्द गिरफ्तार कर सकती है।
ढाबे की आड़ में चलता था वसूली का खेल
हाटा कोतवाली क्षेत्र के मुजहना हेतिमपुर टोल प्लाजा के पास छह माह पूर्व से सेठी ढाबा संचालित होता था। बताया जा रहा है कि इस ढाबे की आड़ में अवैध रूप से चलने वाले वाणिज्यिक वाहनों की एंट्री कराई जाती थी। इन वाहनों से राज्य कर विभाग की कार्रवाई से बचाने के लिए उन्हें सचल दल की लोकेशन की जानकारी दी जाती थी। इस खेल के बदले ढाबा स्वामी हर माह मोटी रकम वसूलता था। सूत्रों के अनुसार, यह अवैध गतिविधि लंबे समय से संचालित थी, जिसकी जानकारी विभाग को सूत्रों के माध्यम से मिली। इसके बाद राज्य कर विभाग की टीम ने सतर्कता बरतते हुए साक्ष्य एकत्र किए और प्रकरण का खुलासा किया।
अफसरों के मूवमेंट की लीक करते थे सूचनाएं
राज्य कर विभाग की टीम ने प्राथमिक जांच के दौरान पाया कि सेठी ढाबा पर अवैध रूप से ट्रक चालकों और टैक्स चोरी करने वाले परिवहनकर्ताओं का जमावड़ा रहता था। यहां से उन्हें राज्य कर विभाग के सचल दस्ते की मूवमेंट की सूचना मिलती थी। बताया गया कि जैसे ही सचल दस्ता किसी इलाके में चेकिंग के लिए निकलता था, वैसे ही ढाबा से जुड़े लोग यह सूचना अवैध परिवहन ऑपरेटरों तक पहुंचा देते थे। इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंच रहा था।
सीओ कसया कुंदन सिंह ने कहा कि अब तक जो भी आरोपी जेल भेजे गए हैं, उनसे पूछताछ और मोबाइल की लोकेशन के आधार पर गोरखपुर के एआरटीओ व जीएसटी के सचल दल के दो चालकों का नाम सामने आया है। दोनों को ट्रेस कर लिया गया है। इन चालकों को शह देने वालों को भी ट्रेस किया जा रहा है। जल्द ही इनकी गिरफ्तारी कर ली जाएगी।