कसया। नगरपालिका परिषद कुशीनगर क्षेत्र में कुत्तों और बंदरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। नगर के लगभग सभी वार्डों में इनके हमलों से लोग दहशत में हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि प्रतिदिन काटे जाने के बाद लोग इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) कसया पहुंच रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इन हमलों में सबसे अधिक बच्चे शिकार बन रहे हैं।
सीएचसी कसया से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर से अब तक 193 लोग बंदरों के काटने और 895 लोग कुत्तों के काटने से घायल होकर अस्पताल पहुंचे हैं। यानी एक ही माह में करीब एक हजार से अधिक लोग इन इनके हमलों से जख्मी हुए हैं। इनमें कई घायलों की हालत गंभीर होने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। बृहस्पतिवार को भी सीएचसी में तीन युवक बंदर के काटने से घायल होकर पहुंचे।
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों पर हुए हमलों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है, जिससे अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। नगर के वार्ड संख्या 26 शहीद अमिय नगर में बीते तीन-चार दिनों के भीतर कई मासूम बंदरों के हमले का शिकार हुए। यहां करीब पांच बच्चों को काट लिया। वहीं सुभाष नगर वार्ड में घर के बरामदे में खेल रही चार वर्षीय बच्ची पर अचानक बंदर ने हमला कर दिया, जिससे उसके चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।
इसके अलावा रामजानकी नगर, वीर सावरकर नगर, मां कोटेश्वरी नगर, वीर अब्दुल हमीद नगर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर सहित कई अन्य वार्डों से भी बंदरों के काटने की लगातार शिकायतें मिल रही हैं। नगरवासियों का आरोप है कि नगरपालिका प्रशासन की ओर से केवल खानापूर्ति की जा रही है। बंदर पकड़ने की व्यवस्था होने के बावजूद इनकी संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है।
वहीं कुत्तों की नसबंदी और पकड़ने को लेकर कोई ठोस योजना जमीन पर दिखाई नहीं दे रही है। इस संबंध में नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी अंकिता शुक्ला ने बताया कि बंदरों के आतंक की जानकारी प्रशासन को है और शीघ्र ही टीम बुलाकर उन्हें पकड़वाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब तक 300 से अधिक बंदरों को पकड़ा जा चुका है।
हालांकि वर्तमान में बंदर पकड़ने का टेंडर केवल लाल बंदरों के लिए है, जबकि नगर में काले बंदरों की मौजूदगी की भी लगातार सूचनाएं मिल रही हैं, जिससे समस्या और जटिल हो गई है। नगर के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कुत्तों और बंदरों पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण किया जाए, नियमित पकड़ अभियान चलाया जाए, कुत्तों की नसबंदी सुनिश्चित की जाए और बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो किसी बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।