पडरौना। शहर के तुलसी इंटर कॉलेज में व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए बने अग्रसारण केंद्र के 700 व्यक्तिगत परीक्षार्थियों का भविष्य अधर में लटका है। यह मामला अब शिक्षा निदेशालय तक पहुंचा गया है, लेकिन परीक्षार्थियों की परीक्षा को लेकर अभी तक कोई सकारात्मक निर्णय नहीं हो सका है। इधर, रविवार को यह मामला गोरखपुर के सांसद के पास पहुंच गया। उन्होंने शिक्षा निदेशक को फोन कर छात्रहित में गंभीरता से विचार कर कार्रवाई के लिए निर्देश दिए हैं। उधर, परीक्षार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होने को लेकर संशय में हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें परीक्षा के लिए प्रवेश पत्र नहीं मिला तो उनका साल बर्बाद हो जाएगा।
गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज, पडरौना में इंटर की परीक्षा वर्ष 2026 में सम्मिलित होने वाले 700 परीक्षार्थियों के प्रपत्रों में कई अनियमितताएं मिली। जांच के दौरान पत्राचार पाठ्यक्रम के तहत इंटरमीडिएट की परीक्षा में शामिल होने वाले परीक्षार्थियों के शुल्क निर्धारित तिथि 20 सितंबर, 2024 तक जमा नहीं होने और पत्राचार पंजीकरण केंद्र में पंजीकृत परीक्षार्थियों के जरूरी प्रमाण पत्रों पर नोडल अधिकारी विकास मणि त्रिपाठी, प्रधानाचार्य पंडित दीन दयाल उपाध्याय राजकीय इंटर काॅलेज, बिंदवलिया के हस्ताक्षर के स्थान पर गोस्वामी तुलसीदास इंटर कॉलेज के प्रधान लिपिक ज्ञान प्रकाश पाठक का हस्ताक्षर होने की बात कही गई थी। हालांकि इस मामले में प्रधान लिपिक शिकायत को पूरी तरह निराधार बताते हुए बोर्ड की तरफ से सभी नियमों का अनुपालन किए जाने का दावा कर रहे हैं।
रविवार को यह मामला गोरखपुर सांसद रवि किशन के पास पहुंच गया। उन्होंने ने मामले में शिक्षा निदेशक को फोन कर छात्रहित को ध्यान में रखते हुए गंभीरता से शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। विवेकानंद युवा पुरस्कार से सम्मानित सूर्य प्रताप मिश्रा ने गोरखपुर सांसद को मामले की पूरी जानकारी दी। बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से प्रारंभ हो रही है, यदि शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो सैकड़ों विद्यार्थियों का एक शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो जाएगा। यदि गलती विद्यालय प्रबंधन या किसी प्रशासनिक स्तर पर है तो उसकी जांच कर संबंधित पर कार्रवाई हो, न कि छात्रों की परीक्षा बाधित हो। इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए गोरखपुर सांसद ने शिक्षा निदेशक समेत संबंधित अधिकारियों से वार्ता कर कार्रवाई करने की बात कही।
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बोले परीक्षार्थी-
बोर्ड परीक्षा की बीते एक वर्ष से तैयार कर रहा हूं। प्रयोगात्मक परीक्षा हो चुकी है। इसके बाद अनुक्रमांक निरस्त होने की जानकारी मिलने पर मन में तरह-तरह के विचार आ रहे हैं। यदि परीक्षा की अनुमति नहीं मिली तो एक वर्ष खराब हो जाएगा। -अभिनय सिंह, छात्रा।
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समय से शुल्क जमा करने के बावजूद विभागीय गलतियों का परिणाम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। इस मामले की जांच कर गलती करने वालों पर कार्रवाई हो। छात्रों का कोई दोष नहीं है। छात्र हित को देखते हुए परीक्षा देने की अनुमति मिलनी चाहिए। -अंशु रावत, छात्र।
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पहले से ही परीक्षा को लेकर तनाव था। अब परीक्षा के लिए जारी अनुक्रमांक निरस्त होने की सूचना मिलते ही एक अलग से तनाव बढ़ गया है। परीक्षा की तैयारी छोड़ अब सभी परीक्षार्थी किसी तरह परीक्षा हो इसमें लगे हैं। -सचिन कुमार, छात्रा।
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पूरे प्रकरण में परीक्षा देने वाले छात्र दोषी नही है। जिस स्तर से गड़बड़ी हुई है उसकी जांच बिल्कुल होनी चाहिए, लेकिन परीक्षार्थियों का भविष्य देखते हुए परीक्षा के लिए हर हाल में अनुमति मिलनी चाहिए, ताकि साल खराब होने से बच सके। -रोहित राव, छात्र।
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तुलसी इंटर कॉलेज से व्यक्तिगत परीक्षा के लिए पंजीकृत 700 छात्रों की परीक्षा उच्चाधिकारियों के स्तर की है। उच्चाधिकारियों की तरफ से मिले निर्देश का अक्षरश: अनुपालन किया जाएगा। -श्रवण कुमार गुप्ता, डीआईओएस, कुशीनगर।