रामकोला। कस्बे के गीतांजलि हाॅस्पिटल के संचालन पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम ने नोटिस जारी किया है। दो दिन के अंदर जिन दो डॉक्टरों के नाम पर अस्पताल का रजिस्ट्रेशन हुआ है। उन डॉक्टरों के साथ दो दिन के अंदर उपलब्ध होकर बयान दर्ज कराने को कहा है, क्योंकि हॉस्पिटल पर न तो डॉक्टर का नाम दर्ज है और न ही वे डॉक्टर अब फोन रिसीव कर रहा है। ऐसे में जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। उन दोनों डॉक्टरों की डिग्री की जांच टीम करेगी इसके बाद ही अस्पताल का संचालन होगा।
रामकोला थाना क्षेत्र के सोहरौना गांव निवासी पूनम देवी की ऑपरेशन के बाद कस्बे के गीतांजलि हास्पिटल में उसकी मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने अस्पताल संचालक अशोक कुमार शर्मा पर प्राथमिकी दर्ज किया। सीएमओ के निर्देश पर मामले की जांच तीन सदस्यी स्वास्थ्य विभाग की टीम कर रही है। टीम में डाॅ. अवधेश प्रसाद, उप जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, डाॅ. शेष कुमार विश्वकर्मा, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी, सीएचसी, डाॅ. आनंद प्रकाश गुप्ता, बाल रोग विशेषज्ञ, सीएचसी, रामकोला शामिल हैं। पूनम के पति का बयान दर्ज करने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संचालक को नोटिस जारी कर दो दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन में शामिल दोनों डॉक्टरों को डिग्री के साथ सीएचसी पर आने के लिए कहा गया है। पूनम के पति राजू ने बताया कि दलालों के चक्कर में पड़कर मेडिकल कॉलेज से पत्नी को लेकर परिजन गीतांजलि हाॅस्पिटल में लाकर भर्ती कर दिया, ऑपरेशन में लापरवाही से उसकी मौत हो गई। स्वास्थ्य टीम की जांच में पता चला कि हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन डॉ. मुकेश कुमार एमएस और डॉ. मीरा शर्मा एमबीबीएस के नाम पर हुआ है। नाम शामिल है और जांच में डॉक्टरों का डिस्प्ले प्लेट नहीं लगा था, ना ही कोई डॉक्टर का नाम दर्शाया गया है, चिकित्सा प्रभारी ने एसके विश्वकर्मा ने अस्पताल पर नोटिस भेज कर गीतांजलि हॉस्पिटल के रजिस्ट्रेशन में जो डॉक्टर का सर्टिफिकेट लगा है उसकी मांग किया है और डॉक्टर को भी दो दिन के अंदर सीएससी पर आकर दिखाने की बात कही है। तब तक के लिए अस्पताल का संचालन न करने की बात नोटिस में लिखी है। चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर एसके विश्वकर्मा ने कहा कि सबसे दिक्कत यह हो रही है कि जिसके नाम से रजिस्ट्रेशन है उसके नाम से हॉस्पिटल पर डिस्प्ले प्लेट नहीं लगा है ना ही उसे डॉक्टर का नंबर उपलब्ध है जो इसके लिए नोटिस भेजा गया है।