फाजिलनगर/पिपरा कनक। विकास खंड तमकुही के जोगियाजनूबी पट्टी गांव में लोकरंग सांस्कृतिक समिति की तरफ से आयोजित दो दिवसीय लोकरंग महोत्सव का शनिवार को भव्य तरीके से आगाज हुआ। इसमें उत्साह, उल्लास और पारंपरिक रंगत की साझी संस्कृति की झलक दिखाई दी।
जन संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित यह महोत्सव इस वर्ष स्वर्गीय तैयब हुसैन की स्मृति को समर्पित है। पहले दिन महोत्सव में लोक कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुतियों देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। शुरुआत रात में करीब 8:30 बजे संबोधन के साथ हुआ।इसके बाद ‘लोकरंग-2026’ स्मारिका का विमोचन किया गया। तत्पश्चात ग्रामीण महिलाओं की ओर से रोपनी-सोहनी गीतों ने लोकजीवन की सजीव झलक पेश की और पूरे वातावरण को लोकमय बना दिया। रात्रि 9:20 बजे पारंपरिक भोजपुरी गायन ने समां बांध दिया, वहीं बुंदेली गायन और सैरा नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
छत्तीसगढ़ के सुआ, करमा, ददरिया, पंथी एवं राउत नाचा जैसे लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियों ने मंच पर सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। इसके बाद त्रिपुरा की खुंमपुरी कल्चरल अकादमी द्वारा होजागिरी नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति दी गई, जिसने अपनी संतुलन कला और लयबद्धता से दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।
देर रात प्रस्तुत राई नृत्य ने भी अपनी अलग छाप छोड़ी और दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। समापन सामाजिक व्यंग्य से भरपूर नाटक ‘उल्लू पंचायत’ के मंचन के साथ हुआ, जिसमें पंचतंत्र की प्रसिद्ध कथा ‘हंस और हंसिनी’ को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। कलाकारों के सशक्त अभिनय और प्रभावी संवादों ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा।
महोत्सव के पहले दिन की सफलता पर आयोजकों ने संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि दूसरे दिन भी विभिन्न राज्यों की लोकसंस्कृतियों से जुड़ी प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगी। संचालन प्रो.दिनेश कुशवाहा ने किया।
अंत में लोकरंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कुशवाहा ने अतिथियों व दर्शकों प्रति आभार ज्ञापित किया। इस मौके पर हदीस अंसारी, भुवनेश्वर राय, नितांत सिंह, सिकंदर गोंड, विष्णुदेव राय, हबीब अंसारी, मंजूर अली, योगेंद्र कुमार, संजय कुशवाहा, अनुभव राय, इसराइल अंसारी सहित गणमान्य लोग शामिल रहे।