पकड़ियार बाजार। खड्डा रेंजर क्षेत्र में हिंसक जंगली जानवरों से निपटने के लिए वन विभाग के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि तेंदुआ, भेड़िया या फिशिंग कैट निकलने की सूचना पर वनकर्मी केवल टार्च और लाठी लेकर ही जंगल, खेत और आबादी में अभियान पर निकलते हैं। कई बार उन्हें ग्रामीणों के सहारे खाली हाथ जानवरों की तलाश करनी पड़ती है।
नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के सिरसिया बुजुर्ग गांव में 25 दिसंबर को एक जंगली जानवर के हमले में महिला के घायल होने की घटना के बाद से वनकर्मी लगातार जानवर की तलाश में जुटे हैं, लेकिन संसाधनों के अभाव में चार दिन बीत जाने के बाद भी उनकी तलाश पदचिन्हों से आगे नहीं बढ़ सकी है। स्थिति यह है कि यदि अचानक जानवर सामने आ जाए तो वनकर्मियों के पास खुद को बचाने के लिए भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है।
खड्डा रेंजर क्षेत्र वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व से सटा होने के कारण यहां जंगली जानवरों की आवाजाही बनी रहती है। बीते वर्षों में इस क्षेत्र में तेंदुए और अन्य हिंसक जानवरों के हमलों की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
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जंगली जानवरों के हमले की पहले भी हो चुकी हैं घटनाएं
पकड़ियार बाजार। मदनपुर सुकरौली में 28 अक्तूबर 2021 को चारा काटने गई कोईली देवी की जंगली जानवर के हमले में मौत हो गई थी। 16 जून 2021 को शिवपुर में तेंदुए ने दो लोगों को घायल कर दिया था। 27 मार्च 2021 को लखुआ में तेंदुए के हमले में पांच लोग घायल हुए थे। एक अप्रैल 2021 को भेड़ी जंगल गांव में तेंदुए के हमले में चार ग्रामीणों के साथ तत्कालीन रेंजर वीके यादव भी घायल हो गए थे। वहीं 22 दिसंबर 2022 को हरपुर गांव में तेंदुए के हमले में आठ लोग घायल हुए थे। 21 सितंबर 2025 को शिवपुर गांव के रामकल्प के बेटे अंकुर को चारा लाने के दौरान तेंदुआ ने घायल कर दिया था। एक सितंबर 2025 को कोटवा कला के मुख्तार और रामजी को तेंदुआ ने घायल कर दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक आधुनिक संसाधन और प्रशिक्षित स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया जाएगा, तब तक न केवल आम लोगों बल्कि वनकर्मियों की जान भी हमेशा जोखिम में बनी रहेगी।
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ये हैं वर्तमान संसाधन
वन विभाग के पास एक जीप, एक जाल, दो पिंजरा, स्नैक कैचर के सहारे जंगली जानवरों को टीम पकड़ती है। इसके अलावा टीम को और भी संसाधनों की जरूरत है। वाइल्डलाइफ प्रशिक्षण प्राप्त वनकर्मी, जानवरों को बेहोश करने वाली ट्रेंकुलाइजर गन, हाइड्रोलिक वाहन, नाइट विजन दूरबीन, रात में जंगली जानवरों की तलाश के लिए लेजर टार्च आदि की संसाधन होने चाहिए।
रेंजर खड्डा अमृता सिंह ने कहा कि खड्डा रेंजर का कुछ हिस्सा टाइगर रिजर्व से सटा होने के चलते हिंसक जानवरों की आवाजाही हो जाती है। शेष हिस्सा सामाजिक वानिकी क्षेत्र है। विभाग के पास जो संसाधन और कर्मी उपलब्ध हैं उनके सहारे हिंसक जानवर को नियंत्रित किया जा रहा है।