कोपजंगल गांव में ग्रामीणों से जानकारी लेती वन विभाग की टीम। स्रोत-सोशल मीडिया
खडडा। क्षेत्र के कोपजंगल गांव, छपिया टोला तथा आसपास के गांवों में बाघ को लेकर लोग दहशत में हैं। एक बकरे पर हमला करने के बाद गांव वाले सतर्क हैं। वन विभाग ने बाघ को पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया है। दो दिन से बाघ की कोई गतिविधि नहीं दिखी है। हालांकि पिंजरे में बकरी नहीं बाधी गई है। वैसे गांव पर वन विभाग नजर है।
तहसील क्षेत्र के कोपजंगल गांव के टोला छपिया निवासी मनोज पाल के झोपड़ी में घुसा बाघ बकरे को खींच ले गया था और मार डाला था। यहां मौजूद दो सगे भाई बाल-बाल बच गए। गांव के लोग बाघ व इसके साथ शावक होने का दावा कर रहे हैं। वन विभाग ने उसे पकड़ने के लिए मनोज पाल के घर के कुछ दूर पिंजरा लगाया है।
वन विभाग की टीम का दावा है कि दो दिनों से बाघ की गतिविधि नहीं मिली है। इसलिए लगे हुए पिंजरे में बकरी को नहीं बांधा गया है। वहीं गांव वाले अभी भी हाथों में डंडा व लाठी लेकर निकल रहे हैं। शाम को जानवरों को छिपाकर गांव वाले बांध रहे हैं।
इसको लेकर आस-पास के टोले व गांव के लोग भी सतर्क हैं। वहीं वन विभाग की ओर से अभी हिंसक जानवर होने का दावा किया जा रहा है।
ग्राम प्रधान यशवंत कुशवाहा ने बताया कि जहां से बकरे का शिकार हुआ था उसके कुछ दूर पिंजरा लगाया गया है। इसमें अभी कोई बकरी नहीं रखा गया है। दो दिन से जानवर की कोई हलचल नहीं देखा गया है, लेकिन अभी भी भय बना हुआ है।