कसया। नगर स्थित महर्षि अरविंद विद्या मंदिर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के बारहवें दिन शनिवार को आदर्श विद्यालय की संकल्पना एवं उसकी आवश्यकता पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ।
मुख्य अतिथि जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश के अध्यक्ष विनोदकांत मिश्रा ने कहा कि आदर्श विद्यालय केवल शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षिक, शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास का केंद्र होता है। ऐसे विद्यालयों में उच्च स्तरीय आधारभूत सुविधाएं, प्रशिक्षित शिक्षक एवं आधुनिक शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे विद्यार्थी 21वीं सदी की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो सकें। उन्होंने कहा कि आदर्श विद्यालयों में स्मार्ट क्लासरूम, विज्ञान प्रयोगशालाएं, कंप्यूटर लैब, स्वच्छ पेयजल, सुरक्षित परिसर तथा खेलकूद की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें विद्यार्थियों की रचनात्मकता और समझ के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाए, न कि केवल रटने की प्रवृत्ति को बढ़ावा दिया जाए। उन्होंने शिक्षकों को आधुनिक शिक्षण तकनीकों से लगातार प्रशिक्षित करने और विद्यालय विकास में अभिभावकों व समाज की सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। संचालन फणींद्र नाथ झा ने किया।
इस जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश के प्रदेश निरीक्षक जियालाल, रणजीत उपाध्याय, मनोज श्रीवास्तव, महेंद्र पांडेय, महेंद्र सिंह, दिवाकर राव, रोशनी शर्मा, धर्मेंद्र साहू, रामजीत सिंह, चंदेश्वर चौबे, तपनारायण कुशवाहा आदि मौजूद रहे।