पकड़ियार बाजार। क्षेत्र के रायपुर खास गांव के चंदन बरवां टोला में चल रहे श्री शतचंडी महायज्ञ में बृहस्पतिवार को कथा वाचक ने सती के चरित्र की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि सती का चरित्र प्रेम, समर्पण और त्याग का संदेश देती है।
कथा वाचक भैरव ने कहा कि सती के पिता राजा दक्ष ने एक यज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें भगवान शिव को जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया। पति के अपमान से दुखी होकर सती ने हवन कुंड में आहुति देकर अपने प्राण त्याग दिए। कहा कि राजा दक्ष शिव को अपना दामाद स्वीकार नहीं करते थे, लेकिन ब्रह्मा के आग्रह पर उन्होंने सती का विवाह शिव से किया था। सती के देह त्याग के बाद भगवान शिव उनके शरीर को लेकर पृथ्वी पर भ्रमण करते रहे। भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 52 खंड किए, जो विभिन्न स्थानों पर गिरे और बाद में शक्तिपीठों के रूप में पूजे गए।