मेडिकल कॉलेज में भर्ती बच्चों के बारे में जानकारी लेते सीएमओ। स्रोत-सोशल मीडिया
कुशीनगर। नेबुआ नौरंगिया, रामकोला और विशुनपुरा ब्लॉक में सात मासूम बच्चों की मौत के बाद जिम्मेदार सतर्क हो गए हैं। तीसरे दिन भी जिले में लखनऊ से आई स्वास्थ्य विभाग की टीम जमी रही। पशुओं के पेशाब, चूहा, छछूंदर से फैलने वाली इस बीमारी को रोकने में गांवों की साफ सफाई और शुद्ध पेयजलकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
प्रभावित गांवों में पेयजल और सफाई का इंतजाम काफी हद तक खराब है। आज भी लोग सामान्य हैंडपंप से पानी पीते हैं। पास में ही गड्ढा खोदा गया है जिसमें नल का पानी जमा हो रहा है। इससे निजात के लिए 15 दिन के लिए दस्तक अभियान चलाया गया है, पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी तो गांवों में दिखाई भी दे रहे हैं, लेकिन जलकल विभाग का कोई कर्मचारी अभी तक गांवों में नहीं आया है। वहीं एक बच्ची में लेप्टोस्पायरोसिस और दूसरे बच्चे की एईएस से मौत की पुष्टि हुई है।
विशुनपुरा ब्लॉक के रोआरी गांव की रहने सालोनी की लिवर फेल होने से मौत हुई है। इसकी वजह हेपेटाइटिस बताई जा रही है, जबकि ढोलहा के गुलहरिया टोले की दो सगी बहनों और चचेरे भाई में खुशी की मौत की पुष्टि लेप्टोस्पायरोसिस से होने की हुई है। वहीं चचेरे भाई और एक बहन की मौत की वजह अभी तक जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं हो सकी। पिपरा खुर्द गांव के अंश की मौत एईएस से होने की जांच में पुष्टि हुई है, जबकि सागर की मौत कैसे हुई इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
रामकोला ब्लॉक के खोटही गांव निवासी शशांक चौधरी की भी मौत की वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। इसका इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा था। डॉक्टरों की ओर से कराए गए सर्वे या परिजनों की बातों पर गौर करें तो मरने वाले सभी बच्चों का लक्षण एक जैसे ही मिले। बीआरडी गोरखपुर और मेडिकल कॉलेज कुशीनगर में बनाए गए दस बेड के पीकू वार्ड में करीब 23 बच्चे बुखार के भर्ती हैं। गुलहरिया गांव के 18 लोगों के सैंपल के कराए गए जांच में एक को स्क्रब टाइफसर भी निकला है। डॉक्टरों के अनुसार अभी तक जो भी बुखार के मरीज आ रहे हैं उनका लक्षण लेप्टोस्पायरोसिस या स्क्रब टाइफस से मिलता जुलता दिख रहा है।
सेम डे में मिल रही गोरखपुर से जानकारी
कुशीनगर से बुखार से पीड़ित बीआरडी में भर्ती बच्चों की जानकारी शाम को 4 बजे तक संबंधित सीएचसी प्रभारी और सीएमओ तक पहुंच जा रही है, नहीं तो विभागीय डाक से आने में दो दिन लग जाते थे।