छोलिया नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार। संवाद
फाजिलनगर। क्षेत्र के जोगिया जनूबी पट्टी गांव में दो दिवसीय लोकरंग महोत्सव का शुक्रवार की रात आगाज हो गया। कार्यक्रम में कलाकारों की प्रस्तुति ने लोक संस्कृतियों को जीवंत कर दिया। महोत्सव का शुभारंभ लोकरंग पत्रिका के लोकार्पण के साथ हुआ। राजू राजन ने अईसन गांव बना द, जहां अत्याचार ना रहे प्रस्तुत कर खूब वाहवाही बटोरी।
लोक गायिका शारदा सिन्हा को समर्पित इस महोत्सव का उद्घाटन मुख्य अतिथि वैज्ञानिक और शायर गौहर रजा ने किया। उन्होंने कहा कि दुनिया की सभी सभ्यताओं की तरह भारत में सकारात्मक व नकारात्मक पहलू हैं, लेकिन हमारी सभ्यता में से अच्छी बातें हैं, जिनका उत्सव मनाया जाना चाहिए। लोकरंग सही मायने में खूबसूरती का जश्न है। लोक संस्कृतियों को संजोने का बेहतर मंच है।
महोत्सव में मतिरानी देवी, शांति, सुशीला, ज्ञांति रुखसाना सुभागी आदि महिलाओं की ओर से गाए गए गीत गाया। इसके बाद आरा बिहार के राजू रंजन, सुनील कुमार, मनोज कुमार रोहित राज तथा सनोज कुमार ने जनगीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को लोक परंपरा से जोड़ा। पिथौरागढ़ उत्तराखंड की प्रकाश रावत एंड पार्टी ने कुमायूं के प्रसिद्ध लोकनृत्य छोलिया प्रस्तुत कर लोकरंग को ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया। अंतरराष्ट्रीय कबीर गायक पद्मश्री प्रहलाद सिंह टिपानिया की कबीर गायकी से पूरा पंडाल झूम उठा। बिलासपुर मध्य प्रदेश से कमलेश के नेतृत्व में पहली बार आई आदिवासी गौड़ एवं धुलिया जनजाति लोकनृत्य की टीम ने कर्मा नृत्य प्रस्तुत लोकरंग में चार चांद लगा दिया। असम से आई सर्लिन रोघांग के नेतृत्व 24 सदस्यीय टीम ने कार्बी आंगलोंग आदिवासी, रीतनांग चिंगड़ी डांस प्रस्तुत कर सबको रोमांचित कर दिया। अंत में ईप्टा पटना की टीम ने नाटककार असगर वजाहत के नाटक वीरगति का मंचन किया। संचालन रीवा विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा ने किया। आगंतुकों के प्रति लोकरंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष व आयोजक सुभाष चंद्र कुशवाहा ने आभार प्रकट किया। आयोजन को सफल बनाने में विष्णुदेव राय, इसरायल अन्सारी, भुनेश्वर राय, हदीस अंसारी, इमरान अंसारी, असलम अंसारी, योगेन्द्र कुमार, अनुभव राय आदि का योगदान रहा।