पडरौना। आज विश्व तंबाकू निषेध दिवस है। यह मानव जीवन को बचाने का एक वैश्विक संदेश है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 1987 में विश्व तंबाकू निषेध दिवस की शुरुआत की थी। मुंह के कैंसर के लगभग 90 प्रतिशत मामलों का संबंध तंबाकू सेवन से होता है। गुटखा और पान मसाला का उपयोग करने से युवा कम उम्र में ही गंभीर रूप से बीमार हो रहे हैं। तंबाकू का दुष्प्रभाव स्वास्थ्य से लेकर पर्यावरण तक हो रहा है।
यह बातें शुभम मणि त्रिपाठी ने कही। उन्होंने कहा कि तंबाकू की खेती और सिगरेट निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। इसके कारण वनों की कटाई, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और जल स्रोतों का प्रदूषण बढ़ता है। इसके अतिरिक्त, सिगरेट के अवशेष विश्वभर में प्लास्टिक प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। विश्व तंबाकू निषेध दिवस यह याद दिलाता है कि स्वस्थ जीवन किसी भी व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी है। तंबाकू छोड़ने का निर्णय केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की रक्षा नहीं करता, बल्कि परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करता है। उन्होंने कहा कि तंबाकू न केवल जीवन को छोटा करता है, बल्कि परिवारों को आर्थिक और सामाजिक रूप से भी प्रभावित करता है।