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धम्म यात्रियों के दल ने बौद्ध मंदिर में की पूजा

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फाजिलनगर में पहली बार पहुंचे धम्म यात्रियों के दल का स्वागत करते ज्वाइंट मजिस्ट्रेट। - फोटो : KUSHINAGAR
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धम्म यात्रियों के दल ने बौद्ध मंदिर में की पूजा
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ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने गुलाब का पुष्प भेंटकर उनका किया स्वागत
फाजिलनगर(कुशीनगर)। कस्बे को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयास में लगे ज्वाइंट मजिस्ट्रेट व नगर पंचायत के प्रशासक का सपना हकीकत में बदलने लगा है। बुधवार को भारत समेत पांच देशों के धम्म यात्रियों का दल बौद्ध मंदिर पहुंचा। इस दल से जुड़े लोगों ने बौद्ध मंदिर में विधिविधान से पूजा-अर्चना की।
कुशीनगर से फाजिलनगर बौद्ध मंदिर पहुंचे धम्म यात्रियों का ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पूर्ण बोरा ने पुष्प भेंट कर स्वागत किया। इसके बाद उन्हें मंदिर ले गए। अमेरिका से आईं धम्म यात्री बाग्मो डिस्की ने बुद्ध से जुड़ी जानकारी ली तो ज्वाइंट मजिस्ट्रेट ने बताया कि भगवान बुद्ध ने अंतिम बार यहां भोजन किया था। भोजन करने के बाद सुबह उनकी तबीयत खराब होने की स्थिति में यहां से कुशीनगर के लिए पैदल चल पड़े थे। बीच रास्ते में उन्होंने कुकुत्था नदी में स्नान करने के बाद जल ग्रहण कर आगे चल दिए और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि इसे केवल इतिहास में चर्चा सुनी थी, लेकिन अब पता चला कि यह स्थान यहां है। निश्चित अब धम्म यात्री जो कुशीनगर आएगा, वह यहां जरूर आएगा। यात्रियों के गाइड धर्मराज प्रसाद ने बताया कि यात्रियों का दल यहां से पूजा करने के बाद बोध गया जाएगा। इसमें अमेरिका, वर्मा, थाईलैंड, बांग्लादेश व भारत के कर्नाटक के यात्री शामिल रहे।
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प्राचीन बौद्ध स्थलों का किया दर्शन
जौरा बाजार(कुशीनगर)। क्षेत्र में स्थित अति प्राचीन स्थलों का नागपुर से आए श्रद्धालुओं ने उस्मानपुर स्थित वीरभारी टीले का दर्शन किया। इसके बाद कुशीनगर चले गए।
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सहायक पर्यटन अधिकारी डॉ. राजेश भारती, इतिहासकार डॉ. श्यामसुंदर के साथ पहुंचे नागपुर के वैशाली ब्रोकर, जगदीश ब्रोकर ने सबसे पहले उस्मानपुर स्थित वीरभारी टीले का दर्शन किया। टिला के पास स्थित अति प्राचीन कुआं को भी देखा। डॉ. श्यामसुंदर सिंह ने बताया कि यह स्थान बौद्ध कालीन राजा हस्तिपाल मल्ल की राजधानी रही थी। भगवान बुद्ध अपनी यात्रा के यहां रुके थे। इसके बाद फरेंदहा स्थित चुंद स्थल पर भोजन किया था। उन्होंने बताया कि भोजन करने के बाद भगवान बुद्घ बीमार पड़ गए। उसके बाद वीरभारी होते हुए घोड़धाप (बकुहर) के रास्ते वे ककुस्था (पुरैना घाट)गए। वहां स्नान करने केे बाद कुशीनगर चले गए।
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