मेडिकल कॉलेज में दवा काउंटर पर उमड़ी भीड़। संवाद
पडरौना। तल्ख मौसम लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। मेडिकल कॉलेज में तेज बुखार और गले में खराश के मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। बुखार का लक्षण मलेरिया और इन्फ्लूएंजा जैसा दिख रहा है, लेकिन खून की जांच कराने में अधिकांश मरीजों को टायफाइड निकल रहा है। इसे ठीक होने के लिए परहेज के साथ-साथ करीब बीस दिनों तक दवा का खुराक लेना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में 980 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ था।
अप्रैल में मई जैसा मौसम एहसास करा रहा है। बड़ों के साथ-साथ बच्चे भी डायरिया और बुखार की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। मेडिकल कॉलेज का चिल्ड्रेन वार्ड फुल हो गया है।
वहीं जनरल वार्ड में भी उल्टी, दस्त और बुखार के मरीज भरे हैं। ओपीडी में आने वाले अधिकांश मरीज तेज बुखार से पीड़ित हैं, दवा खाने के बाद बुखार आराम हो जा रहा है, दवा का असर खत्म होने के बाद ठंड देखर बुखार आ जा रहा है।
इसके अलावा एक सप्ताह दवा खाने के बाद भी आराम नहीं हो रहा है तो मरीज घबरा जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में ऐसे मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। डॉ. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि बुखार से पीड़ित मरीजों का लक्ष्ण देखा जाए तो मलेरिया या इन्फ्लूएंजा जैसा दिख रहा है। इसकी पुष्टि के लिए खून की जांच कराई जा रही है तो अधिकांश मरीजों को टायफाइड निकल रहा है जिसकी वजह गड़बड़ खान पान और पानी दूषित सेवन करना है। डॉक्टर तेल, मसाला और बासी भोजन करने से मना कर रहे हैं। बच्चों या बड़ों को फ्रिज का पानी पीने और धूप से आकर तत्काल पानी नहीं पीने के लिए सलाह दे रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में आए कई मरीज ऐसे थे, जिनको बुखार या सर्दी होने पर मेडिकल स्टोर से दवा लेकर खाए, बावजूद इसके आराम नहीं हुआ तो डॉक्टर के पास आए।