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अहम का समर्पण ही सच्ची भक्ति : आचार्य सुबोध

Sun, 15 Feb 2026 02:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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जौरा बाजार। स्थानीय गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शनिवार को आचार्य आचार्य सुबोध कांत कपिल ने कहा कि कर्म, समर्पण और अहंकार त्याग का संदेश मार्मिक है। अहम का समर्पण ही सच्ची भक्ति है।
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कथा वाचक ने कर्म के तीन प्रकार संचित कर्म, क्रियमाण कर्म और प्रारब्ध कर्म बताए।
उन्होंने कहा कि संचित कर्म हमारे पूर्व जन्मों का संचय है। उन्होंने क्रियमाण कर्म वर्तमान में किए जा रहे कर्म हैं। प्रारब्ध कर्म वह है, जिसका फल जीवन में भोगना ही पड़ता है। उन्होंने अनैच्छिक, परैच्छिक और ऐच्छिक कर्मों की भी व्याख्या करते हुए कहा कि कर्म का फल भोगे बिना मुक्ति नहीं है। कर्म करना आवश्यक है, किंतु कर्तापन का अभिमान नहीं होना चाहिए। कर्म करें, लेकिन उसका अहंकार न करें। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने अहम् को नहीं छोड़ता, तब तक वह ईश्वर के निकट नहीं पहुंच सकता। उन्होंने कहा कि ईश्वर की सर्वोत्तम स्तुति शब्दों से नहीं, बल्कि मौन से होती है। मौन ही भगवान की सर्वोच्च आराधना है, क्योंकि मौन में ही आत्मा का साक्षात्कार संभव है। भक्ति बाहरी प्रदर्शन नहीं, बल्कि भीतर की शुद्धि है। जब मन निर्मल हो जाता है, तब ईश्वर स्वयं प्रकट होते हैं। इसके बाद उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कथा विस्तार से सुनाई। कथा का शुभारंभ मुख्य यजमान पारसनाथ सिंह व राजपति देवी ने व्यास पीठ का पूजन कर किया। अंत में आरती कर श्रद्धालुओं में प्रसाद वितरित किया गया।
इस दाैरान पूर्व प्रधानाचार्य दयाशंकर मिश्र, डाॅ. महेंद्र सिंह, नंदलाल पाठक, सुनीता शाही, हरिनाथ सिंह, इंजीनियर अजय उपाध्याय, कृष्णानंद उपाध्याय, देवेंद्र उर्फ इंदू उपाध्याय, रविंद्र राय, अशोक उपाध्याय, वशिष्ठ चौबे, विद्या सिंह, डाॅ. विजयपाल सिंह, डाॅ. आनंद पाल सिंह, यशपाल सिंह, डाॅ. पुनीत सिंह, डाॅ. अजयपाल सिंह, शिवब्रत सिंह, जनार्दन सिंह आदि मौजूद रहे।
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