कसया। पूर्वी उत्तर प्रदेश का प्रमुख गन्ना उत्पादक जनपद कुशीनगर में गन्ना फसल किसानों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है, लेकिन बीते छह वर्षों में जिले में गन्ना उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
गन्ना किसान संस्थान प्रशिक्षण केंद्र, पिपराइच (गोरखपुर) के पूर्व सहायक निदेशक एवं गन्ना विशेषज्ञ ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि वर्ष 2018-19 से 2024-25 के बीच जिले में 300 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का गन्ना उत्पादन घट गया है, जो चिंताजनक है। उन्होंने रामकोला, खड्डा, ढाढ़ा और सेवरही चीनी मिल क्षेत्रों का भ्रमण एवं कुशीनगर के विकास में गन्ना फसल की भूमिका पर अध्ययन के बाद यह जानकारी दी। ओम प्रकाश गुप्ता ने बताया कि कुशीनगर की मिट्टी और जलवायु गन्ने की खेती के लिए सर्वोत्तम है, बावजूद इसके उत्पादन में गिरावट आ रही है।
उन्होंने किसानों से उन्नत तकनीक अपनाने और उत्पादकता 250 कुंतल प्रति एकड़ से बढ़ाकर 350 से 400 कुंतल प्रति एकड़ करने की अपील की।
सहफसली खेती से लागत घटाने और आय बढ़ाने पर भी उन्होंने जोर दिया।आंकड़ों का हवाला देते हुए गुप्ता ने बताया कि पेराई सत्र 2018-19 में जिले की चीनी मिलों ने 392 लाख कुंतल गन्ने की पेराई की थी, जिससे किसानों को लगभग 1260 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ।
वहीं पेराई सत्र 2024-25 में यह आंकड़ा घटकर 253.81 लाख कुंतल रह गया और किसानों को केवल 922 करोड़ रुपये का भुगतान हो सका। इस प्रकार छह वर्षों में 300 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान किसानों को उठाना पड़ा।
किसानों के अनुसार गन्ने की खेती में सबसे बड़ी समस्या गन्ने की छिलाई और मजदूरों की कमी है। एक एकड़ गन्ने की खेती में 110 से 120 मजदूर लगते हैं, जिससे गांवों में रोजगार तो मिलता है, लेकिन लागत भी तेजी से बढ़ रही है। गांव बकनहा के किसानों ने बताया कि पांच मजदूर मिलकर ट्रेलर लोड करने पर 600 से 700 रुपये प्रति ट्रेलर कमाते हैं, जबकि प्रतिदिन प्रति मजदूर 1500 से 1800 रुपये तक की आमदनी हो रही है।