कुशीनगर। मेडिकल कॉलेज के एसएनसीयू वार्ड से नवजात चोरी होने के बाद वार्डों में सख्ती बढ़ा दी गई है। एसएनसीयू, पीकू और चिल्ड्रेन वार्ड में जाने के लिए बच्चों के माता-पिता का आधार कार्ड जमा करना होगा। रजिस्टर में आधार नंबर, मोबाइल नंबर और रिश्ता दर्ज होने के बाद वार्डों में एंट्री मिलेगी।
एसएनसीयू वार्ड में नवजात को दूध पिलाने के लिए बाहर नहीं निकाला जाएगा। मां को अंदर ही बैठकर फीडिंग कराने की व्यवस्था कर दी गई है, लेकिन मेडिकल कॉलेज के दक्षिण और पश्चिम दिशा की तरफ से खुली बाउंड्री से लोगों का आना-जाना शुक्रवार को भी लगा रहा। बाउंड्रीवाल के बाहर सटे मेडिकल स्टोरों पर भी प्रशासन की ओर से शिकंजा कसा जाएगा।
नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के मनिया छपरा गांव निवासी रीना देवी को मेडिकल कॉलेज में मंगलवार की रात प्रसव हुआ। महिला ने बच्चे को जन्म दिया। दूध पीने में दिक्कत होने पर डॉक्टर ने एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करा दिया। बुधवार को दिन में करीब 12 बजे नवजात एक नंबर वार्मर से चोरी हो गया। इस मामले में रविंद्र नगर थाने में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज किया।
पुलिस की सक्रियता के बाद बृहस्पतिवार को नवजात को पडरौना कोतवाली के एक गांव से बरामद कर लिया गया। इस घटना को लेकर हुई जांच में मेडिकल कॉलेज में खामियां व लापरवाही मिली। नवजात के बरामद होने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन चौकन्ना हो गया है।
मेडिकल कॉलेज के अंदर ओपीडी, आईसीयू, एसएनसीयू, चिल्ड्रेन वार्ड, पीकू और मइरजेंसी में गार्डों की सक्रियता रही। वार्डों में एक रजिस्टर बना दिया गया है। एंट्री से पहले आधार कार्ड और मरीज का रिश्ता बताने के बाद भेजा जा रहा है। एसएनसीयू वार्ड में भर्ती नवजात को फीडिंग के लिए बाहर नहीं भेजा जा रहा है। अंदर ही नवजात के मां की एंट्री कराकर फीडिंग कराया जा रहा है।
अलग से इसके लिए एक कमरे में बेड लगा दिया गया है। वहीं जिन नवजातों को उपर का दूध देना है, उनके परिवार का कोई सदस्य आधार कार्ड लेकर अंदर जा रहा है और दूध या अन्य जरूरी सामान नर्सों को देकर बाहर चला आ रहा है। बारी-बारी से मरीज के साथ आने वालों की अब एंट्री दी जा रही है। गेट पर ही गार्ड की तैनाती की गई है।
पहले गार्ड इधर उधर घूमते रहते थे और ड्यूटी के दौरान गायब भी हो जाते थे। अगर किसी महिला का ऑपरेशन से बच्चा हुआ है और वे एमसीएच विंग में भर्ती है, उसके नवजात को अगर मां का दूध पिलाना है और मां आने में असमर्थ है तो गार्ड की मौजूदगी में परिजन नवजात को लेकर मां के पास जाएंगे और दूध पीने के बाद नवजात को लाकर एसएनसीयू में रखा जाएगा।
वार्ड के नोडल से लेकर सुपरवाइजर तक की अब जवाबदेही तय होगी। पूरे दिन और रात के ड्यूटी तथा आने-जाने वालों की निगरानी कराई जाएगी। सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज के बाउंड्री के बाहर सात से अधिक मेडिकल स्टोर संचालित होते हैं। बाउंड्री पर दुकानदार खड़े रहते हैं और दलाल मेडिकल कॉलेज के ओपीडी से मरीजों को बातों में उलझाकर पर्चा पहुंचाते हैं।
कई बार पूर्व में मामला पकड़ा जा चुका है। इन मेडिकल स्टोरों पर भी प्रशासन की ओर से शिकंजा कसा जाएगा। बाउंड्री की ऊंचाई बढ़ाने के अलावा एंगल लगाकर तार लगवाया जाएगा, ताकि मेडिकल स्टोर संचालकों का मेडिकल कॉलेज से नेटवर्क टूट सके। मेडिकल कॉलेज के अंदर तो सुरक्षा सख्त दिखी, लेकिन बाहर अभी भी लापरवाही बरती जा रही है।
प्राचार्य मेडिकल कॉलेज डॉ.आरके शाही ने कहा कि चहारदीवारी को ऊंचा किया जाएगा। मेडिकल स्टोर संचालकों पर कार्रवाई के लिए जिला प्रशासन से मदद ली जाएगी। वार्डों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वार्डों में आने-जाने वालों का रजिस्टर में नाम दर्ज कराया जा रहा है। बिना आधार कार्ड की किसी की एंट्री नहीं कराई जा रही है। सभी वार्डों में गार्डों की तैनाती कर दी गई है। एसएनसीयू वार्ड में आने वालों की दो लेयर में जांच कराई जा रही है।