राजकीय आयुर्वेद एवं यूनानी अस्पताल के वार्ड में रखा गया सामान।
- फोटो : अमर उजाला
पडरौना। प्राचीन आयुर्वेद पद्धति के तहत रोगियों के इलाज के लिए 31 वर्ष पहले पडरौना में खुले राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय को अब तक खुद का भवन नहीं मिल सका है। तीन बार इसकी जगह भी बदल चुकी है, फिर भी किराए के भवन में ही संचालित हो रहा है। अस्पताल तक जाने के लिए न तो ढंग की सड़क है और न ही अस्पताल में जरूरत की दवाएं। यहां जगह की कमी के कारण साजमान रखने के लिए वार्डों को ही स्टोर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
पडरौना के राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय की स्थापना वर्ष 1987 में हुई थी। उस समय नगर के छावनी मुहल्ले में स्थित मंगल भवन में इसका संचालन शुरू हुआ था। उसके बाद यह अस्पताल जटहां रोड पर चला गया। फिर कुछ वर्षों तक इसका संचालन छावनी में ही स्थित पुराने एसबीआई भवन में हुआ। वर्ष 2010 में यह अस्पताल बगल में ही छावनी की एक कॉलोनी में आ गया, जहां एक ही भवन में यह अस्पताल और क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी कार्यालय दोनों संचालित होता है। राजकीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सालय में जगह की कमी होने के कारण तीन अलग-अलग कमरों में वार्ड बना है। यह अस्पताल 25 बेड का है, लेकिन मरीजों को भर्ती करने की नौबत कभी-कभार ही आती है।
लिहाजा दवाइयां, कुर्सियां और अन्य सामान इन वार्डों में रख दिया गया है। क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. प्रकाशचंद ने बताया कि आयुर्वेदिक एवं यूनानी अस्पतालों के लिए दवा उपलब्ध हो गई है। जल्द ही पडरौना सहित इस तरह के सभी अस्पतालों में दवाएं मुहैया करा दी जाएंगी। अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध न हो पाने की वजह से भवन नहीं बन पा रहा है। इसीलिए इसे किराए के भवन में संचालित किया जा रहा है। जैसे ही जमीन उपलब्ध हो जाएगी, भवन बनवाने के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।