रमेश की मौत के बाद रोते बिलखते परिजन।स्रोत-सोशल मीडिया
बोदरवार। कप्तानगंज थाना क्षेत्र के अगया गांव निवासी सेना के जवान रमेश कुमार का पार्थिव शरीर शुक्रवार को पैतृक गांव आते ही गांव में मातम छा गया। उनके अंतिम दर्शन और श्रद्धांजलि देने के लिए ग्रामीणों के साथ ही आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग उमड़ पड़े। हर आंख नम थी और माहौल गमगीन रहा।
अगया के सुदर्शन चौधरी के इकलौते पुत्र रमेश कुमार करीब 20 वर्ष पहले भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। इन दिनों वह अहमदाबाद में तैनात थे। बताया जाता है कि पीटी के दौरान वह बेहोश होकर गिर गए। सेना के अस्पताल में उनका निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार सहित पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। रमेश कुमार अपने पीछे 80 वर्षीय मां तेतरा देवी, पत्नी सोनम, 12 वर्षीय पुत्र ऋषभ और 10 वर्षीय पुत्री राशि को छोड़ गए हैं। परिवार के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी रमेश कुमार के कंधों पर थी। वर्तमान में उनकी पत्नी और बच्चे अहमदाबाद स्थित सेना के आवास में उनके साथ रह रहे थे।
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15 अगस्त को लेने आने की बात कही थी, 14 को ही शव देखना पड़ा
-शहीद की 80 वर्षीय मां तेतरा देवी बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर बिलख पड़ीं। उन्होंने कहा, एक सप्ताह से मेरी तबीयत खराब है। मेरी बीमारी की खबर मिलते ही बेटे ने फोन कर कहा था कि मां, मैं 15 अगस्त को तुम्हें लेने आ रहा हूं। कौन जानता था कि बदनसीब मां को 15 अगस्त के बजाय 14 अगस्त को ही अपने सैनिक बेटे का शव देखना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अब बहू और छोटे-छोटे बच्चों की परवरिश कौन करेगा। बेटे के कंधों पर ही पूरे परिवार का भार था। बेटे को खोने के साथ परिवार का सहारा भी छिन गया। शहीद के अंतिम दर्शन के लिए चेयरमैन प्रतिनिधि सतीश चौधरी, ग्राम प्रधान रवींद्र यादव, आयुष चौधरी, पूर्व प्रधान फतेबहादुर, इंद्रभान, मार्कंडेय आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। गांव में हर तरफ शोक और वीर सपूत को खोने का गम दिखाई दिया।