संवाद न्यूज एजेंसी
पडरौना। जिले से गुजरने वाली ट्रेनों में नशीले पदार्थों के धंधेबाज सक्रिय हैं। बिहार में शराबबंदी और नेपाल सीमा से निकटता के कारण तस्करों ने ट्रेनों को अपना सुरक्षित रास्ता बना लिया है।
आरपीएफ और जीआरपी की लाख सख्ती के बावजूद चरस, गांजा और अवैध शराब की खेप धड़ल्ले से पार कराई जा रही है। पुलिस की नजरों से बचने के लिए अब धंधेबाज महिलाओं को बतौर ‘कैरियर’ इस्तेमाल किया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, तस्करी के सिंडिकेट अब ग्रामीण महिलाओं और कम उम्र की युवतियों को लालच देकर इस धंधे में उतार रहे हैं। महिला यात्रियों पर आमतौर पर सुरक्षाकर्मियों को संदेह कम होता है, जिसका फायदा उठाकर ये ‘कैरियर’’ छोटे बैग या कपड़ों के नीचे नशीले पदार्थों की खेप छिपाकर गंतव्य तक पहुंचाती हैं।
जिले में बीते चार महीनों में कुशीनगर के विभिन्न स्टेशनों, विशेषकर कप्तानगंज, पडरौना और खड्डा में तस्करी के दर्जनों मामले सामने आए हैं।
हालिया आंकड़ों के अनुसार ट्रेनों व स्टेशनों पर कई खेप शराब व मादक पदार्थों की बरामद हुई हैं। जबकि धंधेबाज नहीं पकड़ में आ पाते हैं। ऐसे में आरपीएफ व जीआररपी सहित पुलिस के लिए अवैध तरीके से मादक पदार्थों का धंधा करने वालों पर अंकुश लगाए जाना चुनौती बना हुआ है। इनसे सुरक्षा को भी खतरा बना हुआ है।द