पडरौना। जिले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था बेपटरी हो गई है। अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की बेहद कमी है। मरीजों को मजबूरी में झोलाछाप और फर्जी निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों के कुल 78 पदों में से केवल 33 पर ही तैनाती है। ऐसे में सरकारी अस्पतालों पर आने वाले मरीजों को प्राथमिक इलाज के बाद रेफर कर दिया जा रहा है। इसी मजबूरी का फायदा उठाकर निजी अस्पताल संचालक बाहर बड़े डाॅक्टरों के नाम का बोर्ड लगाकर मरीजों व तीमारदारों को फंसा कर उनकी जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
सरकारी अस्पतालों का हाल यह है कि यहां डॉक्टरों के स्वीकृत 78 पदों में से 45 पद खाली पड़ हैं। जो 33 डाक्टर तैनात भी हैं,उनमें से ज्यादातर बाल रोग विशेषज्ञ हैं। इसका नतीजा यह है कि दिली की बीमारी,नस की बीमारी,हड्डी के बड़े आपरेशनों के लिए जिले में कोई सरकारी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं। महिला डॉक्टरों की कमी के कारण रात के समय प्रसव कराने के लिए मरीजों को दर-दर भटकना पड़ता है। मेडिकल कॉलेज में भी विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी है। कार्डियोलॉजी, न्यूरो,इएनटी के डाक्टर नहीं होने के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है।
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रेफर करने की जगह बने सरकारी अस्पताल
कस्बों व गांव के मरीज सरकारी अस्पताल में बेहतर इलाज की उम्मीद से पहुंचता है लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण वहां तैनात स्टाफ व डाॅक्टर देखने के तत्काल बाद मेडिकल कॉलेज कुशीनगर व गोरखपुर आदि के लिए रेफर कर देते हैं। ऐसे में मरीज व तीमारदार दोनों की परेशानी बढ़ जाती है। इससे कई बार मरीजों के सही उपचार नहीं मिलने व अधिक समय गुजर जाने से जान जाने का खतरा भी बना रहता है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की इस अव्यवस्था में सुधार होने की कोई ठोस पहल नहीं दिखाई दे रहा है।
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बड़े डॉक्टरों के नाम पर खेल
सरकारी अस्पताल से निराश होकर मरीज के तीमारदार बाहर निकलते हैं, तो वहां निजी अस्पतालों के दलाल उन्हें घेर लेते हैं। ये दलाल तीमारदारों को निजी अस्पतालों में बेहतर व सही इलाज का दावा कर अपने जाल में फंसा लेते हैं। उन्हें वहां ले जाते हैं, जहां अस्पताल के बाहर नामी डॉक्टरों के नाम के सिर्फ बोर्ड लगे होते हैं। तीमारदारों को यह भरोसा हो जाता है कि इतने बड़े डाॅक्टर यहां बैठते हैं तो इलाज अच्छा होगा। लेकिन हकीकत यह है कि बोर्ड पर लिखे नाम वाले डॉक्टर कभी आते ही नहीं। उनकी आड़ में बिना डिग्री वाले कंपाउंडर व अस्पतालों के मालिक व अप्रशिक्षित स्टाफ मरीजों का इलाज करते हैं। इन अस्पतालों पर इलाज के नाम पर भारी-भरकम बिल भी बना दिया जाता है।
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कोट:
जिले से छह डाॅक्टर पीजी करने गए हैं। विशेषज्ञ डाॅक्टरों की कमी के चलते गंभीर मरीजों का सीएचसी पर उपचार करना संभव नहीं है। तीन सर्जन बीमार होने के कारण मरीजों को रेफर करना पड़ता है। विशेषज्ञ डाॅक्टरों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। -डॉ. चंद्रप्रकाश, सीएमओ कुशीनगर