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सीएचसी विशुनपुरा में चिकित्सकों का टोटा

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सीएचसी विशुनपुरा में चिकित्सकों का टोटा
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जटहां बाजार (कुशीनगर)। ब्लॉक मुख्यालय मंसाछापर गांव में स्थित विशुनपुरा सीएचसी में स्टॉफ की कमी है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात नहीं हैं। ऐसे में लोगों को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल या निजी अस्पतालों में जाने के लिए विवश होना पड़ रहा है। मंगलवार दोपहर 12 बजे इस अस्पताल में कई स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं थे। टीकाकरण भी नहीं हो रहा था। इंतजार में लोग परिसर में बैठे थे।
पड़ताल में पता चला विशुनपुरा सीएचसी पर करीब दो लाख 53 हजार लोगों के स्वास्थ्य के देखभाल की जिम्मेदारी है। यहां पद सृजन के हिसाब से स्टॉफ की तैनाती नहीं है। इतना ही नहीं सीएचसी पर विशेषज्ञ चिकित्सक भी तैनात नहीं हैं।
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अस्पताल में चिकित्सक के कुल सात पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष सिर्फ एक चिकित्सक जो इस समय प्रभारी चिकित्साधिकारी हैं, डॉक्टर लेखिका सिंह तैनात हैं। जबकि दो संविदा के डॉक्टर हैं। फार्मासिस्ट के चार पद सृजित हैं, उसके सापेक्ष तीन तैनात हैं। यहां वार्ड ब्वॉय के चार पद सृजित हैं, लेकिन तैनाती दो की है। उनमें एक बीमार हैं। एलटी का दो पद सृजित है और एक की तैनाती है। स्टॉफ नर्स के चार पद सृजित हैं। इसके सापेक्ष महज दो की तैनाती है। ईटीसी में तीन के सापेक्ष दो की तैनाती है। यहां स्वीपर के चार पद हैं, लेकिन तैनाती किसी की नहीं है। दो स्वीपर संविदा पर तैनात कर कार्य चलाया जाता है। आंख के डॉक्टर के दो पद हैं, लेकिन एक की तैनाती है। दंत चिकित्सक दो पद हैं। उसके सापेक्ष एक की तैनाती है। हेल्थ सुपरवाइजर के पांच पद हैं, जिसके सापेक्ष तीन की तैनाती है। सीएचसी पर दवा पर्याप्त है। चीफ फार्मासिस्ट अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि यहां दवा का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन गैस की दवा नहीं है। कुत्ते के काटने पर लगने वाला एंटी रैबीज इंजेक्शन, सांप के काटने पर दी जाने वाली दवा और एंटी स्नेक वॉयल उपलब्ध है। सप्ताह के बुधवार और शनिवार को इंजेक्शन लगाया जाता है।
‘कई बार आए, मगर नहीं लगा टीका’
पड़री पिपरपाती गांव के प्रभु प्रसाद ने बताया कि कोरोनारोधी टीका लगवाने आए हैं, लेकिन नहीं लगाया जा रहा है। यहां दवा की स्थिति ठीक है। इसी गांव के सदानंद ने बताया कि टीका लगवाने आए हैं, लेकिन नहीं लगाया जा रहा। उन्होंने बताया कि कई बार इसके लिए आ चुके हैं।
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‘उपलब्ध संसाधन से बेहतर करने का प्रयास’
विशुनपुरा सीएचसी की प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. लेखिका सिंह ने बताया कि यहां विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं। शिशु रोग के भी डॉक्टर नहीं हैं, जिससे कुछ दिक्कतें हो रही हैं। फिलहाल जो संसाधन हैं, उस हिसाब से बेहतर करने की कोशिश की जा रही है।
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