धर्मसिंहवा। मेंहदूपार में चल रही रामकथा में शुक्रवार को कथा व्यास गौरव कृष्ण शास्त्री ने कहा कि शबरी ईश्वर के प्रति समर्पण की प्रतीक हैं। जो दर्शाती है कि भगवान जाति ऊंच-नीच का ध्यान न देते हुए प्रेम के भूखे हैं।
कथा व्यास ने कहा कि माता शबरी ने मतंग ऋषि की आज्ञा मानकर वर्षों तक राम के आने पर विश्वास रखा जो कि धैर्य की पराकाष्ठा को दर्शाता है। माता शबरी के द्वारा भगवान राम को जूठे बेर खिलाना प्रेम का सर्वोच्च प्रदर्शन माना जाता है। भगवान राम ने माता शबरी की कुटिया में उन्हें नवधा भक्ति (भक्ति के नौ प्रकार) का ज्ञान प्रदान किया, जो रामायण में दार्शनिक पहलुओं में से एक है।
कथा के दौरान राज केसरी शुक्ला, मनीष शुक्ला, अंबरीष नारायण, हरिश्चंद्र शुक्ला, हरिराम शुक्ला, लौहर शुक्ला, हरिशंकर शुक्ला सहित अन्य मौजूद रहे।