कप्तानगंज। बेतिया एस्टेट की जमीन की तलाश तेज हो गई है। बिहार सरकार के सचिव और कर्मचारी कप्तानगंज और हाटा तहसील में डेरा डाले हुए हैं। सात से अधिक गांवों में 34 एकड़ जमीन की तलाश करने पर राजस्व विभाग का पसीना छूट रहा है। चकबंदी के दौरान बेतरतीब गाटा होने के चलते अधिकांश जमीनों पर लोगों का कब्जा है। कोई खेती किसानी कर रहा है तो किसी ने मकान का निर्माण करा लिया है। अब जांच शुरू हुई है तो लोगों को आशियाना टूटने की आशंका लोगों को सता रही है। मथौली नगर में 80 से अधिक लोगों ने मकान का जहां निर्माण कराया है, वहीं धार्मिक स्थल भी बना दिए गए हैं। शनिवार को भी टीम कप्तानगंज तहसील में जमी रही।
बेतिया एस्टेट की जमीन आज भी जानकी कुंवरी देवी बेवा हरेंद्र किशोर निवासी बेतिया एस्टेट के नाम से अभिलेखों में दर्ज है। लेकिन, जब बेतिया एस्टेट रियासत टूटने के बाद संपूर्ण जमीन बिहार सरकार के अधीन हो गई थी। लेकिन, जमीन की निगरानी न होने और वर्ष 1975 में चकबंदी के दौरान स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से सभी गाटा संख्या में उलट फेर कर दिया गया। इसके पीछे साजिश रची गई कि जमीन अलग-अलग रहेगी तो इसको अवैध कब्जा करना आसान हो जाएगा। इसके चलते जमीन के अधिक हिस्सों पर अवैध कब्जा किया गया है। इसके चलते जमीन का सर्वे और सीमांकन करना मुश्किल दिखाई दे रहा है। इसको लेकर बिहार सरकार की अधिकारियों का इसके लिए आना-जाना लगा है। अभी तक जमीन की सही जानकारी नहीं मिल पाई और इस कार्रवाई को देखकर अवैध कब्जेदारों में हड़कंप मचा है।
गांव के ही लोग इस जमीन की सही जानकारी देने में परहेज कर रहे हैं। क्योंकि इन लोगों को भी सही जानकारी नहीं है। वहीं हाटा तहसील क्षेत्र के नगर पंचायत मथौली के वार्ड नंबर चार पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में बेतिया एस्टेट की जमीन पर लगभग 80 लोग चार पीढ़ियों से पक्का-मकान का निर्माण कराकर अपने परिवार के साथ रह रहे हैं। इतने दिनों के बाद बिहार सरकार बेतिया एस्टेट की जमीन को अपने राजस्व कर्मचारी से जमीन का डाॅक्यूमेंट्री बनवा रही है। लोगों को चिंता है कि उनका आशियाना टूट जाएगा। वार्ड के 80 वर्षीय अमेरिका पाल, विरेंद्र कुमार पाल ने बताया वह करीब चार पीढ़ियों से यहां मकान का निर्माण कराकर रह रहे हैं। आज तक बेतिया एस्टेट के तरफ से न कोई नोटिस मिला न ही किराया मांगा गया है। उन्होंने ने बताया इसी नंबर से यहां पर परिषदीय विद्यालय का भी संचालन हो रहा है।
मथौली नगर में माता चेंडा देवी मंदिर स्थित है। यह भी बेतिया एस्टेट की जमीन में हैं। मथौली नगर निवासी प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, विनोद कुमार श्रीवास्तव, नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया जो बेतिया एस्टेट की कचहरी की जमीन है। वह जमीन भी उनके कब्जे में है। उनके पिता स्व. मुरलीधर वर्मा ने 1950 से इस जमीन का प्रति माह पांच रुपये शुल्क डीएम कार्यालय गोरखपुर में जमा करते हैं। वहीं, नगर के वार्ड नंबर 15 स्वामी विवेकानंद नगर में बेतिया एस्टेट की जमीन पर लगभग लोग 15 घर बनाकर परिवार के साथ रहते हैं। कुछ जमीन में तलाब है।
-
जमीन के कागजातों में हो चुकी है हेराफेरी
-कप्तानगंज तहसील क्षेत्र के गांव सिघाड़ी में स्थित बगीचा गांव गंभीर निवासी रामाश्रय सिंह ने बेतिया एस्टेट की जमीन को अपने नाम करा लिया था। इसकी जानकारी जब गांव निवासी रामसुरेश शाही को जानकारी हुई तो कप्तानगंज तहसील में मुकदमा कर रामाश्रय का नाम खारिज करा कर फिर बेतिया एस्टेट के नाम जमीन करा दी। उस समय से अब तक बगीचा की देखरेख कप्तानगंज तहसील की ओर से ही की जाती है। उधर, रामाश्रय सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बगीचे की जमीन का मुकदमा लड़ रहे हैं।
अयोध्या में भी है एस्टेट की संपत्ति
कप्तानगंज क्षेत्र के बुजुर्ग भोला सिंह, बृद्धिचंद सिंह, बचाई मिश्रा, राम नगीना सिंह सहित अन्य लोगों का कहना हैं कि हम लोगों के पूर्वजों की ओर से बताया जाता रहा कि बेतिया एस्टेट कह जमीन अयोध्या में भी है। एक मंदिर एस्टेट का है, जहां अक्सर आना-जाना रहता था। उनकी सोच थी कि बेतिया से जब अयोध्या को जाए तो अपनी निजी जमीन से हो कर जाए। इसी उद्देश्य से उस समय छोटे-छोटे रियासतों को खरीदना शुरू किया। यह वही जमीन बताई जा रही है।
-
मेरे गांव में बेतिया एस्टेट की जमीन लगभग 10 एकड़ के करीब थी और एक पक्के मकान की छावनी थी। बाद में सिटी मजिस्ट्रेट गोरखपुर से जुड़े एक अमीन अक्सर गांव आते थे और छावनी को नीलाम भी की गई थी। लेकिन, यह चर्चाओं के दौरान सुना जाता है। चकबंदी के दौरान सभी गाटा संख्या इधर से उधर हो गए, जिसके चलते जमीन कहां-कहां है, इसकी सही जानकारी तभी होगी जब इन्हें चिह्नित किया जाएगा।
परमहंस कुमार मोहन, मुंडेरा निवासी
-
-बेतिया स्टेट की जमीन हमारे गांव में कई जगह पर है, लेकिन कुछ परती भूमि है और कुछ अगल-बगल के लोगों की ओर से जोती जा रही है। जमीन की सही नवैयत तब तक नहीं पता चलेगी, जबतक इसकी पैमाइश नहीं हो जाती है।
- सुभाष यादव, साखोपार
बेतिया एस्टेट की जमीन को लेकर कर बिहार सरकार के अधिकारियों का आना-जाना हो रहा है। जिस गांव में बेतिया एस्टेट की जमीन है, वहां के लेखपाल को लगा दिया गया है। वह केवल नक्शा टीम के सामने प्रस्तुत करेंगे और तहसील प्रशासन का जिम्मा सिर्फ यही होगा कि शांति व्यवस्था बनी रहे। बेतिया एस्टेट की जहां भी जमीन है। उसकी तलाश अभिलेखों के अनुसार की जा रही है। पैमाइश भी कराई जा रही है।
दिनेश कुमार, तहसीलदार, कप्तानगंज