कसया। महर्षि अरविंद विद्या मंदिर में आयोजित नवचयनित आचार्य प्रशिक्षण वर्ग के तेरहवें दिन मुख्य अतिथि क्षेत्रीय सह संगठन मंत्री पूर्वी उत्तर प्रदेश रामनाथ ने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों के संवाहक होने चाहिए। शिक्षक अपने श्रेष्ठ आचरण और व्यक्तित्व से विद्यार्थियों में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं। कहा कि संस्कृति एवं संस्कार को केंद्र में रखकर विद्या भारती की स्थापना हुई है। विद्या भारती के विद्यालय समाज पोषित विद्यालय हैं। उन्होंने कहा कि एक कुशल आचार्य बनने के लिए स्वयं में सुधार, अनुशासन और अच्छे आचरण का विकास आवश्यक है। विद्यालय का वातावरण मंदिर के समान पवित्र होना चाहिए और परिसर में महापुरुषों और देवी-देवताओं के प्रेरणादायी चित्र एवं विद्यार्थियों को संस्कारवान बनाने वाले संदेश प्रदर्शित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के निर्माण में विद्या भारती का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। शिक्षकों को चाहिए कि वे ज्ञान के साथ-साथ विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित करें।
संचालन दिवाकर राम त्रिपाठी ने किया। इस दौरान प्रदेश निरीक्षक जन शिक्षा समिति गोरक्ष प्रदेश जियालाल, फणींद्रनाथ ओझा, रणजीत उपाध्याय, मनोज श्रीवास्तव, महेंद्र पांडेय, दिवाकर राव, रोशनी शर्मा, धर्मेंद्र साहू, रामजीत सिंह, चंदेश्वर चौबे, तपनारायण कुशवाहा सहित सभी नवचयनित प्रशिक्षु आचार्य एवं कर्मचारी मौजूद रहे।