बारिश से नदियों में उफान, बाढ़ का खतरा बढ़ा
डीएम और एसपी ने बंधों पर जाकर देखा हाल, ग्रामीणों को किया सजग
जिले में बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क
पडरौना (कुशीनगर)। बारिश से बाढ़ का खतरा को बढ़ गया है। नेपाल में हो रही बारिश से गंडक नदी में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। बंधों की मरम्मत में लापरवाही, ठोकरों के निर्माण में ढिलाई से तटबंधों के टूटने की आशंका से लोग सहमे हैं। दो दिनों से रुक-रुककर हो रही बारिश से बंधे जवाब देने लगे हैं। जिले की नदियों में उफान की सूचना पर डीएम और एसपी ने बृहस्पतिवार को बंधों पर जायजा लिया।
डीएम ने बाढ़ राहत और बचाव के लिए तैनात कर्मचारियों को अधिकारियों ने 24 घंटे सजग रहने के निर्देश दिए। जनता की सुविधा के लिए हेल्पलाइन लाइन नंबर पर आने वाली सूचनाओं को तत्काल सुनकर संबंधित विभागों को जानकारी देने के भी निर्देश दिए। इस दौरान सिंचाई विभाग के अधिकारियों सहित आपदा राहत विभाग और पुलिसकर्मी मौजूद रहे।
बरवापट्टी प्रतिनिधि के अनुसार गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए अमवाखास बंधे का डीएम एस राजलिंगम और एसपी धवल जायसवाल का निरीक्षण किया। अमवाखास बांध के लक्ष्मीपुर किमी 7.900 से किमी 8.600 तक नाबार्ड की परियोजना के काम में लापरवाही देखकर डीएम नाराज हुए। सिंचाई विभाग के एक्सईएन को जल्द काम पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने एसडीएम तमकुहीराज को भी जरूरी निर्देश दिए। इस मौके पर एक्सईन महेश कुमार सिंह, एसडीओ रमेश यादव, जेई मनोज त्रिपाठी, पीआरओ राघवेंद्र सिंह, एसआई अभिषेक यादव, ग्राम प्रधान अशर्फी यादव आदि मौजूद रहे।
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टापू में तब्दील पिपराघाट के कई पुरवे
तमकुहीरोड। गंडक नदी में बुधवार शाम करीब पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद पिपराघाट के कई पुरवे बाढ़ के पानी से टापू बन गए। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे ही पानी आता रहा तो सड़कों पर आवागमन बंद हो जाएगा।
सेवरही विकास खंड का पिपराघाट एहतमाली और पिपराघाट मुस्तकिल ग्राम सभा गंडक नदी और बांसी नदी के दोआबा में बसे हैं। गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने पर इन गांवों सहित खेती भी डूब जाती है। बुधवार देर शाम वाल्किमीकि नगर बराज से गंडक में पौने तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद पिपराघाट एहतमाली व पिपराघाट मुस्तकिल के मुसहरी टोला, जोगनी, देवनारायण , उपाध्याय, शिवटोला, बिनटोलियां, तेजू, भंगी, मोतीराय, इमिलिया के साथ अन्य ग्राम सभाओं के कई टोले पानी में घिर गए हैं। जिला पंचायत सदस्य शर्मा यादव, ग्राम प्रधान रामाजी निषाद, क्षेत्र पंचायत सदस्य सरल शर्मा, प्रभुनाथ यादव, पुजारी सिंह, ध्रुव निषाद, संजय सिंह, पन्नालाल यादव, राजेंद्र सिंह का कहना है कि वाल्किमीकि नगर बराज का पानी जब गंडक नदी छोड़ा जाता है कि इस क्षेत्र में 20-22 घंटे लग जाते हैं। बुधवार को छोड़े गए पानी का असर बृहस्पतिवार शाम तक नजर आएगा। तमकुहीराज के तहसीलदार दीपक कुमार गुप्त का कहना है कि बाढ़ सुरक्षा के लिए तहसील प्रशासन गंभीर है।
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एपी बांध और नरवाजोत बांध पर बना दबाव
एपी बांध व नरवाजोत बांध पर लगातार गंडक का दबाव बढ़ता जा रहा है। इससे कचहरी टोला के वजूद पर खतरा मंडराने लगा है। क्योंकि नदी कई घरों से सटकर बहने लगी है। वर्ष 2017 में नदी ने इस गांव को निशाने पर ले लिया था। कटान से करीब डेढ़ सौ मकान पानी में समा गए थे। अब यहां पर सिर्फ 20-25 घर ही बचे हैं। यूपी बिहार बार्डर के अहिरौलीदान का कचहरी टोला दहरी टोला, तवकल टोला, चैनपट्टी, विरवट कोंन्हवलिया, बाकखास सहित अन्य कई जगहों पर पानी का दबाव बनने लगा है। गांव के बलिस्टर सिंह, विक्रमादित्य सिंह, सकल देव सिंह, सूर्यदेव सिंह, जवाहर सिंह, नंदकिशोर सिंह, राजकिशोर सहित कुल 20 घर ही बचे हुए हैं। इस गांव के विश्वनाथ सिंह, पप्पू सिंह, ओसियर गुप्ता, संजय सिंह, ओमप्रकाश बैठा, सुजीत यादव, भगवान पासवान सहित अन्य लोगों का कहना है कि 2017 की कटान के बाद सुरक्षा के कोई प्रबंध नहीं किए गए हैं। बाढ़ खंड तृतीय के सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है। फिलहाल कोई खतरा नहीं है।
गंडक नदी का डिस्चार्ज 267200 क्यूसेक बढ़ा
खड्डा। दो दिन में 158 मिमी हुई बारिश से गंडक नदी का डिस्चार्ज 267200 क्यूसेक तक पहुंचने के बाद बृहस्पतिवार को नहीं बढ़ा। बुधवार रात 10 बजे नदी का जलस्तर खतरे के निशान 96.00 मीटर से 13 सेमी नीचे 95.87 रह गया था। 23 जून तक महज चार मिमी बारिश हुई थी।
29 जून को 64 मिमी, 30 जून को 94 मिमी बारिश दर्ज की गई है। बुधवार शाम सात बजे वाल्मीकि गंडक बराज से नदी में 2,67200 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इसके चलते खड्डा क्षेत्र के भैैंसहा गेज स्थल पर रात दस बजे जलस्तर चेतावनी बिंदु से 87 सेमी ऊपर पहुंच गया। 13 सेमी पानी बढ़ने पर नदी खतरे के निशान पर पहुंच जाती। बृहस्पतिवार दोपहर तीन बजे पानी 192200 क्यूसेक पर आ गया। पानी का बढ़ने से बाढ़ प्रभावित बसंतपुर, मरचहवा गांव के पास कटबासी नाला उफान पर आ गया है। संवाद