तमकुहीरोड। एपी व नरवाजोत बांध की सुरक्षा के लिए बनाए गए ठोकर (स्पर) इन दिनों बदहाल स्थिति में हैं। एक तिहाई से अधिक ठोकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनकी कई वर्षों से मरम्मत नहीं कराई गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मानसून के दौरान वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में अधिक पानी छोड़ा गया तो ये क्षतिग्रस्त ठोकर बांध और उससे सटे गांवों के लिए खतरा बन सकते हैं।
सेवरही क्षेत्र में नरवाजोत एक्सटेंशन से अहिरौलीदान तक करीब साढ़े 17 किमी लंबाई में गंडक नदी बहती है। गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए बाढ़ खंड ने बांध के साथ-साथ विभिन्न स्थानों पर 45 से 50 ठोकर बनाए गए हैं। इनमें नरवाजोत, पिपराघाट, जंगलीपट्टी, घघवा जगदीश, जवही दयाल, विरवट कोन्हवलिया, बाक खाश, बाघाचौर, नोनियापट्टी और अहिरौलीदान प्रमुख हैं। वैसे तो आधे से अधिक ठोकर अभी सुरक्षित हैं, लेकिन एक तिहाई ठाकर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दुबे ने बताया कि ठोकर बांध की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाते हैं। तेज धारा बांध की ओर बढ़ती है तो ठोकर पानी का रुख मोड़ देते हैं, जिससे बांध पर दबाव कम पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले नदी बांध से दूर बहती थी और ठोकर 150 से 200 मीटर लंबे बनाए जाते थे। लगातार दबाव के कारण कई ठोकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं और उनकी लंबाई भी घट गई है। एक वर्ष पूर्व विरवट कोन्हवलिया और नरवाजोत में ठोकरों पर अधिक दबाव बढ़ने से बांध पर खतरा उत्पन्न हो गया था, जिसे विभागीय अभियंताओं ने समय रहते टाल दिया था। लोगों का कहना है कि इस समय बांध सुरक्षा से जुड़ी तीन परियोजनाओं पर काम चल रहा है, लेकिन यदि क्षतिग्रस्त ठोकरों की मरम्मत नहीं हुई तो आगामी मानसून में हालात बिगड़ सकते हैं।