फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेंदुआ की खबर का फालोअप

विज्ञापन
विज्ञापन
खड्डा क्षेत्र में वन कर्मियों को संसाधन का अभाव
विज्ञापन

खड्डा (कुशीनगर)। एक तरफ वाल्मीकि टाइगर रिजर्व तथा दूसरी तरफ सोहगी बरवा वन्य जीव अभयारण्य से घिरा होने के बावजूद खड्डा क्षेत्र में वन विभाग के पास हिंसक जानवरों को पकड़ने के लिए न तो विशेषज्ञ हैं और न ही विशेष उपकरण। वनरक्षक हाथ में डंडा लिए हिंसक जानवरों को पकड़ने का जोखिम उठाते हैं। बृहस्पतिवार को ऐसे ही कारनामा के चलते खुद रेंजर घायल हो गए जबकि एक वनकर्मी भी घायल हो गया।
हर वर्ष जंगल से निकल कर खूंखार जानवर खड्डा क्षेत्र में पहुंचकर लोगों की जान संकट में डालते रहते हैं। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व व महराजगंज जनपद के सोहगीबरवा वन्यजीव अभयारण्य की सीमा खुली होने के चलते जानवर रिहायशी इलाके में पहुंच जाते हैं। इतने संवेदनशील इलाके में स्थित खड्डा वन रेंज संसाधन के अभाव से जूझ रहा है। एक सप्ताह से खड्डा व महराजगंज के कोठीभार थाना क्षेत्र के रिहायशी इलाके में घूम रहा तेंदुआ रेंजर खड्डा सहित 14 लोगों को घायल कर चुका है। अभी तक नहीं पकड़े गए इस वन्य जीव के चलते इलाके के लोग दहशत में हैं। इस तरह का यह पहला मामला नहीं है। बीते दिसंबर में तेंदुआ ने भैंसहा गांव के कोटवा टोला में घुसकर 6 वर्ष की बच्ची व 25 वर्ष की महिला को घायल कर दिया था। कुछ वर्ष पहले लक्ष्मीपुर पड़रहवा गांव में तीन लोगों को जख्मी कर पंद्रह दिनों तक उत्पात मचा रखा था। पकड़ी बृजलाल व गंगवा छापरा में एक साधू व दो लोग तेंदुआ हमले में घायल हो गये थे। इसी तरह तुर्कहा गांव के सरेह में एक महिला व खड्डा के लोहिया नगर मोहल्ले में घुसकर आधा दर्जन लोगों को भी तेंदुआ घायल कर चुका है। सिसवा गोपाल गांव व सोहरौना गांव के सरेह में तेंदुआ ने बछड़े को मार डाला था। नदी पार शिवपुर गांव में गाय को मार डाला था। करदह गांव में बाघ की मौजूदगी व पद चिह्न मिलने पर तत्कालीन डीएफओ बीसी ब्रह्मा ने कांबिग कराया था। खड्डा क्षेत्र के रामपुर गोनहा, बंजारी पट्टी, सोनबरसा सरेह में अक्सर बाघ व तेंदुआ देखे जाने का शोर मचता रहता है।
विज्ञापन

कामचलाऊ सामान ही है उपलब्ध
वन विभाग के अनुसार गंडक नदी के दियारा व दोनों तरफ लगभग डेढ़ सौ गांव के इलाके में फैले खड्डा वन क्षेत्र में वर्तमान में एक रेंजर, दो वन दरोगा, तीन वन रक्षक, छह माली, एक जीप चालक व एक अन्य कर्मचारी तैनात है। इस कार्यालय के पास एक राइफल व एक दो नाली बंदूक है। हिंसक जानवरों को पकड़ने या काबू में करने के लिए पिंजरा, जाल, बॉडी प्रोटेक्टर, ड्रोन कैमरा, ट्रेकर आदि कोई भी संसाधन नहीं है। बीते 26 मार्च को लखुआ लखुई गांव में जब तेंदुआ पकड़ने डंडा लेकर वन कर्मचारी पहुंचे तो लोगों का गुस्सा झेलना पड़ा। तेंदुआ पकड़ने के लिए बाहर से पिंजरा व वन कर्मचारियों को मंगाना पड़ा था।
विज्ञापन

‘जरूरी संसाधन की मांग की जाएगी’
रेंजर खड्डा बीके यादव का कहना है कि वन्य जीवों से लोगों की रक्षा के लिए जरूरी उपकरण आवश्यक हैं। इस तरह के हालात से निपटने के लिए खड्डा रेंज पर आवश्यक संसाधन की मांग की जाएगी, क्योंकि यह क्षेत्र दो तरफ से वन सेंचुरी सीमा से सटा है, अक्सर ही हिंसक जानवर भटक कर आबादी में आ जाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें