जौरा बाजार। अमवा श्री दूबे में अतुल कृष्ण भारद्वाज ने सोमवार को यज्ञ के अंतिम दिन श्रीराम कथा का वर्णन किया। कहा कि दूसरों की संपत्ति चाहे कितनी भी मूल्यवान हो, उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि रामायण हमें जीने का तरीका सिखाता है। रामायण हमें आदर, सेवा, भोग, त्याग व बलिदान का ज्ञान देता है।
उन्होंने कहा कि भगवान कण-कण में विराजमान हैं। जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने दीन-दुखियों, वनवासियों, आदिवासियों के कष्ट दूर करते हुए उन्हें संगठित करने का कार्य किया एवं उस संगठित शक्ति के द्वारा ही समाज में व्याप्त बुराइयों को दूर किया। उसी प्रकार आज भी समाज में व्याप्त बुराइयों को अच्छे लोगों को संगठित करके ही दूर किया जा सकता है।
श्री राम के राज्याभिषेक का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि बुराई और असत्य ज्यादा समय तक नहीं चलते। अंततः अच्छाई और सत्य की जीत होती है। अधर्म पर धर्म की जीत हमेशा होती आई है। श्रीराम के राज्याभिषेक के प्रसंग के दौरान पुष्पा की वर्षा कर भक्त झूमने लगे।