मृत्यु से शांति नहीं, नए जीवन का आरंभ होता है : बापू
संवाद न्यूज एजेंसी
कसया। रामकथा के आठवें दिन भी मोरारी बापू ने श्रद्धालुओं की चिट्ठी पढ़कर उनके प्रश्नों के उत्तर दिए।
एक साधक ने पूछा बापू मृत्यु से शांति मिलती है। बापू ने उत्तर दिया नहीं। मृत्यु से शांति नहीं, दूसरे जीवन का आरंभ होता है। जीवन की नई यात्रा की शुरूआत होती है। एक नवल जीवन का शुभारंभ होता है। सत्य कड़वा होता है का जवाब देते हुए बापू ने उत्तर दिया सत्य कड़वा नहीं होता है। उसे कड़वा बनाया जा रहा है। साधु की क्या पहचान है। इसका उत्तर देते हुए मोरारी बापू ने कहा कि साधु सरल स्वभाव का होता है। जिसके स्वभाव में कुटिलता न हो, समझ लेना वह साधु है।
एक साधक ने पूछा कि आप का किसी से झगड़ा हुआ है इसका उत्तर देते हुए बापू ने कहा कि आज तक किसी से झगड़ा नहीं हुआ। झगड़ा देखकर या सुनकर मैं आश्चर्यचकित हो जाता हूं। कोई व्यक्ति दूसरे के साथ विवाद कैसे कर सकता है। राजतंत्र और लोकतंत्र में कौन अच्छा है का उत्तर देते हुए मोरारी बापू ने कहा कि इसमें फंसने की जरूरत नहीं है। बापू आप कभी बैचेन होते है कि नहीं। इसका उत्तर देते हुए कहा कि मुझे सिर्फ हरिनाम की बैचैनी होती रहती है। हर पल चैन बरसता है, जंगल में योगी बसता है, कभी रोता है कभी हंसता है सुनाकर श्रद्धालुओं को गुदगुदाया भी।