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Kushinagar News: बारिश से तबाह हुए अरमान, किसानों की मेहनत पर पानी

Sat, 01 Nov 2025 02:42 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कुशीनगर
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सुमही संतपट्टी गांव में बारिश के पानी मे डूबी धान की फसल। संवाद   
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पडरौना। चक्रवाती तूफान मौनथा का जिले में खासा असर पड़ा है। कभी तेज तो कभी हल्की हवा के बीच हो रही लगातार बारिश से खेत में पककर तैयारी खड़ी धान की फसल धराशाई हो गई है। इन फसलों को देख किसान के चेहरे मायूस हो गए हैं। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।
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लगातार मौसम खराब रहने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित कर दी है। ठंड ने भी दस्तक दे दी है, जिससे लोग रात के समय गर्म कपड़े का प्रयोग करने लगे हैं। हालांकि मौसम विभाग ने शनिवार की दोपहर से मौसम साफ होने और रविवार की सुबह से धूप होने की संभावना जताई है।
खेत में पककर तैयार धान की सफल की मढ़ाई के लिए किसान तैयारी में जुटे थे। कई किसानों ने अपनी धान की फसल की मढ़ाई कर शुरू भी कर दिए थे। कृषि विभाग के अनुसार जिले में अभी तक करीब 60 फीसदी धान की फसल खेत में खड़ी है।
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ऐसे में बीते बुधवार से मौसम ने करवट बदली तो किसानों को लगा कि हल्की बूंदाबादी के बाद मौसम सही हो जाएगा, लेकिन तूफान मौनाथ की वजह से बीते तीन दिन से लगातार जिले में कभी हल्की तो कभी तेज हवा के साथ रिमझिम बारिश हो रही है।
शुक्रवार को पूरे दिन आसमान में काले बादलों ने क्षितिज पर डेरा जमाए रखा। जिले में कही ज्यादा तो कहीं कम बूंदाबांदी हुई हैं। कुदरत के इतनें रंगों को देख कर किसान व्याकुल है। खेतों में खड़ी धान की फसल गिर जाने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। परेशान खेत में गिरे धान की फसल को नुकसान से बचाने के इंतजाम में लगे हैं। उधर नवंबर के पहले पखवाड़े में आलू की बुआई की तैयारी कर रहे किसानों ने खेत में नमी अधिक होने की वजह से आलू की बुआई अभी टाल दिए हैं।
मौसम विभाग के अनुसार जिले में शुक्रवार को हुई बारिश की वजह से मौसम का तापमान सामान्य से एक डिग्री सेल्सियस कमी दर्ज की गई। इस दिन मौसम का अधिकत तापमान 28.2 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। शनिवार को मौसम का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। जौरा बाजार प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में बारिश के बीच चली हवा ने ठंड बढ़ा दी है। बीते 36 घंटे से रिमझिम बारिश का सिलसिला चल रहा है। शुक्रवार तक काली घटाएं छाईं रहीं। तेज हवा के साथ हुई बारिश से खेत में पक कर तैयार धान की फसल गिर गई है। उसे देख किसान चिंतित हैं। तमकुहीरोड प्रतिनिधि के अनुसार सेवरही क्षेत्र में लगातार दो दिन से हो रही बारिश व तेज हवा ने धान की फसल को नष्ट कर दिया है। सेवरही क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित गांव के आसपास गन्ने की फसलों के साथ अधिकांश धान की खेत में फसल गिर गया है।
पानी भरे खेत में किसान धान की कटाई करने में लगे थे। लेकिन एक पखवाड़े मे दूसरी बार हुई तेज बारिश ने क्षेत्र के राजपुर खाश, सुमही संतपट्टी, सुमही संग्राम, दवनहा, पकड़ीयार पूरबपट्टी, अवदान टोला, मिश्रौली, रानीगंज, पिपराघाट सहित आदि गांव के किसान हरेंद्र यादव, कैलाश सिंह, ब्यास कुशवाहा, मनोज गुप्ता, ध्रुव निषाद आदि ने कहा कि इस भारी बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
बारिश से फसलों पर बर्बाद होने का खतरा बढ़ गया है। अगर खेतों से पानी नही निकला तो न केवल उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि रवी के फसलों की बुवाई पिछड़ सकती है। पकड़ियार बाजार प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र में हुई बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। लगातार तीन दिनों से रुक-रुक कर हो रही वर्षा ने जहां धान की फसल को नुकसान पहुंचाया, वहीं रबी फसलों की बुवाई पर भी प्रतिकूल असर डाला है। खेतों में पानी भर जाने से कटाई का कार्य ठप हो गया है, जिससे किसान भारी चिंता में हैं। क्षेत्र के पकड़ियार ,चरिघरवा,दहाउर, कोटवा, पिपरा वर सिवान,सिंगहा, कठनहिया, पचफेड़ा, हरपुर, मठिया खुर्द गांव के किसानों का कहना है कि इस समय धान की कटाई का चरम दौर चल रहा था। अधिकांश खेतों में फसल कट चुकी थी, लेकिन बारिश से कटे हुए धान भीगकर सड़ने लगे हैं। खुले में रखे बोरे व फसलें नमी से खराब हो रही हैं।
कई खेतों में पानी भर जाने से फसलें झुक गई हैं, जिससे उनकी कटाई कठिन हो गई है। राजराम ने बताया कि इस बार मौसम की मार ने उनकी आर्थिक स्थिति को गहरा झटका दिया है। किसान खेदन ने बताया कि धान की फसल अच्छी हुई थी, लेकिन अब बारिश से आधी फसल खेत में ही सड़ने लगी है। किसान रमेश का कहना है कि खेती पहले ही महंगी हो गई है।
अब इस नुकसान से उबरना मुश्किल होगा। तीन दिनों से हो रही बारिश से खेतों में जलभराव के कारण गेहूं, मटर और सरसों की बुवाई भी प्रभावित हो रही है। मिट्टी गीली होने के कारण खेतों की जुताई संभव नहीं है, जिससे बुवाई में देरी होगी और उत्पादन पर असर पड़ेगा।
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किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि क्षेत्र में फसलों का सर्वे कर क्षति का आकलन किया जाए और प्रभावित किसानों को मुआवजा दिया जाए।
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