- लोकरंग पत्रिका विमोचन के साथ कार्यक्रम का औपचारिक उदघाटन
विद्याभूषण रावत, रामजी यादव, केम चंदलाल समेत कई साहित्यकारों ने पत्रिका का विमोचन किया
अमर उजाला ब्यूरो
फाजिलनगर( कुशीनगर)। सांस्कृतिक भड़ैती, फूहड़पन के विरुद्ध जनसंस्कृति के संवर्धन के लिए क्षेत्र के जोगियां जनूबीपट्टी गांव में आयोजित दो दिवसीय लोकरंग महोत्सव का शुभारंभ शनिवार की रात में लोकरंग पत्रिका के विमोचन के साथ किया गया। वरिष्ठ पत्रकारों व साहित्यकारों ने एक साथ पत्रिका का विमोचन कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरूआत की।
भोजपुरी के प्रसिद्ध गीतकार भोलानाथ गहमरी व विख्यात गायक मोहम्मद खलील को समर्पित इस चौदहवें लोकरंग महोत्सव का उद्घाटन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार रामजी यादव ने कहा कि लोक संस्कृति नदियों के समान है। जैसे नदियां अपने बहाव क्षेत्र को हरा भरा बना देती हैं, वैसे ही लोक संस्कृतियां भी अपने क्षेत्र को सुखमय बना देती हैं। पिछले कुछ वर्षों में लोक कलाओं के नाम पर जो फूहड़पन परोसा गया, उससे ग्रामीण स्तर तक के लोग दु:खी थे। उदघाटन कार्यक्रम के बाद गांव की महिलाओं ने पीड़िया गीत के जरिए कार्यक्रम को ऊंचाई दी। पीड़िया गीत मतिरानी देवी, पूजा, अंशु, प्रीति व अमृता ने गाया। इसके बाद परिवर्तन रंग मंडली जीरादेई सिवान की टीम के आशुतोष, फिरोज आलम, अजीत शाह, पंकज राम, प्रतिमा कुमारी, नितम, अंशु शर्मा कबिता आदि ने लोकगीत की प्रस्तुति दिया।
कार्यक्रम आयोजक वरिष्ठ कथाकार सुभाष चंद्र कुशवाहा ने कार्यक्रम आयोजन के दौरान आई कठिनाईयों से अवगत कराते हुए कार्यक्रम की विस्तृत रूप रेखा प्रस्तुत किया।
दक्षिण अफ्रीका के भोजपुरी गायक केम चन्दलाल की भोजपुरी गायकी पर सभी दर्शक झूम उठे । केम चन्दलाल भोजपुरी और हिंदी बोल नही पाते है लेकिन उनकी प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि किसी भी कला को जानने और सीखने के लिये भाषा आड़े नहीं आ सकती। नटरंग कल्चरल एसोसिएशन जपरकुरी नालाबासी असम की टीम ने संगीता बर्मन के निर्देशन में बिहू नृत्य की प्रस्तुति देकर लोकरंग को उंचाई पर पहुंचा दिया। इस टीम में नाबाजीत बर्मन, पालवी बर्मन, अस्मिता बर्मन, पिनाकी बर्मन, पल्लवी राजबोगशी, शताब्दी शर्मा हीरक दास, दीपांकर आदि शामिल थे।
बुंदेलखंड राई नृत्य पार्टी मे शामिल लोक कलाकार करन सरन, प्रियंका, संध्या, सुजान सिंह, नंदकिशोर, भगवान दास, कमलेश भजन लाल सोनी, रामेश्वर प्रसाद आदि ने राई नृत्य की प्रस्तुति से सबको आकर्षित कर लिया। इसके बाद राजस्थानी लोकगीत एवं नृत्य, पारम्परिक मांगणियार के कलाकार इमामुद्दीन, चिरमी सपेरा, पापिया कालबेलिया, जस्सा खान, टगा राम भील भील आदि ने हारमोनियम, ढोलक, मोरचंग, ढोल आदि की जुगलबंदी प्रस्तुत कर लोकरंग के आयोजन में चार चांद लगा दिया। अंत मे परिवर्तन रंग मंडली जीरादेई की टीम ने आशुतोष मिश्र द्वारा निर्देशित व उमेश थपलियाल द्वारा लिखित नाटक तुम सम पुरुष ने मो सम नारी नाटक का मंचन किया जिसमे एक युवक जो कामचोर है, अपने को सम्पन्न बताकर एक युवती से शादी कर लेता है। शादी के बाद जब वह ससुराल आती है तो उसे पता चलता है कि मुझसे झूठ बोलकर शादी की गई है, इसके बाद दोनों के संबंधों में दुराव आ जाता है। इस नाटक को फिरोज आलम, अजीत शाह, प्रतिमा,विवेक कुमार सिंह, पंकज कुमार राम, अनूप कुमार आदि ने प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन रीवा विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर दिनेश कुशवाहा ने किया। कार्यक्रम के पूर्व सभी आगन्तुकों के प्रति आभार प्रकट करते हुए लोकरंग सांस्कृतिक समिति के अध्यक्ष व आयोजक सुभाषचंद कुशवाहा ने सभी के प्रति आभार प्रकट करते हुए दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम की रूपरेखा बताई। इस आयोजन को सफल बनाने में विषुदेव राय, हदीश अंसारी, इसरायल अन्सारी, भुनेश्वर राय, संजय, सिकन्दर, हबीब , मंजूर, राजदेव कुशवाहा, अनुभव राय, जमशेद, श्रीनरेश राय, मुस्ताक, असलम आदि का बिशेष योगदान है।