विधानसभा चुनाव को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने चुनाव संबंधी पंफलेट और पोस्टर आदि के प्रकाशन पर तब तक के लिए रोक लगा दी है। जब तक वे निर्धारित प्रारूप पर संपूर्ण विवरण नहीं देते। आयोग के आदेश का उलंघन करने वालों पर कारावास अथवा जुर्माना की कार्रवाई हो सकती है। उप जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में जिला पंचायत कार्यालय के सभागार में सोमवार को बैठक की गई, इसमें मौजूद प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को इस बारे में निर्देशित किया गया।
एडीएम और उप जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्णलाल तिवारी ने प्रिंटिंग प्रेस संचालकों को बताया कि निर्वाचन आयोग ने पंफलेट, पोस्टर तथा इस तरह की किसी भी सामग्री के प्रकाशन एवं मुद्रण पर रोक लगा दी है। न तो कोई प्रिटिंग प्रेस संचालक प्रकाशन करेगा और न ही कोई प्रकाशित कराएगा, जब तक कि प्रकाशक की पहचान की घोषणा उनकी तरफ से हस्ताक्षरित तथा दो व्यक्ति जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हों, उनकी तरफ से सत्यापित न किया गया हो। प्रिटिंग प्रेस संचालकों को इस बारे में दो प्रारूपों पर विवरण भी प्रस्तुत करना है, जिसमें उनका नाम, पता, मुद्रण आदेश की तिथि, प्रकाशक की घोषणा तारीख, निर्वाचन पोस्टर, पंफलेट आदि का विवरण, मुद्रण की तिथि सहित कई बिंदुओं पर सूचना देनी है। उन्होंने बताया कि इस मामले में निर्वाचन आयोग के आदेश की अवहेलना करने वालों पर कारावास अथवा जुर्माना से दंडित होना पड़ सकता है। जाति, धर्म, समुदाय, भाषा आदि को लेकर भी किसी प्रकार का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। बैठक के माध्यम से विधानसभा चुनाव के उम्मीदवारों और उनके समर्थकों को भी निर्वाचन आयोग के आदेश का पालन करने के लिए निर्देशित किया गया। एडीएम ने कहा कि आयोग के आदेश का पालन करने में असफल रहने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्घ भी कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट संजीव रंजन, वरिष्ठ कोषाधिकारी उमेश कुमार उपाध्याय, सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी श्यामनारायण प्रसाद, चकबंदी बंदोबस्त अधिकारी और अन्य अफसरों के अलावा चुनाव कार्यालय के सभी स्टॉफ एवं प्रिंटिंग प्रेस संचालक मौजूद थे।