- 12 हेक्टेयर आलू बीजोत्पादन के लिए जमीन प्रक्षेत्र में रही है संरक्षित
- 32 हेक्टेयर में है बागवानी, पौधशाला, चहारदीवारी, नाली, भवन, सड़क व खेती की भूमि
- 176 क्विंटल कुफरी सिंदूरी की होगी बुवाई, 600-700 क्विंटल होगी पैदावार
- बारिश के चलते बुवाई में एक पखवाड़े की होगी देरी
पकवा इनार (कुशीनगर)। राजकीय आलू प्रक्षेत्र व पौधशाला कसया (बरवा फार्म) में इस बार कम रकबे पर आलू के बीज का उत्पादन किया जाएगा। सिर्फ 4.7 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ही आलू की खेती कर बीजोत्पादन किया जाएगा। इसमें 176 क्विंटल कुफरी सिंदूरी (ब्रीडर) प्रजाति का आलू का बीज लगेगा। इसे राजकीय शीतगृह अलीगंज (लखनऊ) से इस महीने के अंत तक लाया जाएगा। बुवाई नवंबर में होगी। बुवाई पर करीब पांच लाख रुपये खर्च होंगे।
रबी बुवाई सत्र 2023-24 में आलू बीजोत्पादन के लिए 4.7 हेक्टेयर क्षेत्रफल में खेती की जाएगी। इसके लिए फार्म में तैयारी को सुगबुगाहट आरंभ हो गई है। तीन व चार अक्तूबर को हुई बारिश के चलते बुवाई के लिए खेत की तैयारी में एक पखवाड़े का विलंब होगा। राजकीय आलू प्रक्षेत्र में बीजोत्पादन के लिए खेत के अलावा बागवानी व पौधशाला के लिए भी क्षेत्र बना हुआ है। आवारा पशुओं सहित अन्य बाहरी सुरक्षा के लिहाज से प्रक्षेत्र के चारों तरफ ऊंची पक्की चहारदीवारी है। प्रक्षेत्र में बीजोत्पादन के लिए अलग क्षेत्र है। वहीं आम, लीची व अमरूद की बागवानी व पौधशाला भी है। यहां से पौधरोपण अभियान में इमारती व फलदार पौधों का वितरण किया जाता है।
कुफरी सिंदूरी प्रजाति की विशेषताएं
- सड़न बहुत कम होती है।
- तीन से चार माह तक सामान्य वातावरण में भी सुरक्षित रखा जा सकता है।
- पूर्वांचल के जलवायु लिए उपयुक्त प्रजाति है।
- नुकसान कम होता है।
- पाला का असर नगण्य होता है।
- 110 से 130 दिन में फसल तैयार हो जाती है।
- 210 से 230 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है।
रबी बुवाई सत्र 2023-24 में आलू बीजोत्पादन के लिए 4.7 हेक्टेयर क्षेत्रफल में कुफरी सिंदुरी (ब्रीडर) प्रजाति के आलू की खेती की जाएगी। बीजोत्पादन के लिए बीज राजकीय शीतगृह अलीगंज लखनऊ से 176 क्विंटल बीज आवंटित हो चुका है। बुवाई के लिए खेत की जुताई बारिश होने के चलते में एक पखवाड़े विलंब से ही हो पाएगी। । बुवाई से लेकर उत्पादन तक करीब 6 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस खर्च में बीज की कीमत नहीं शामिल होगी। बीजोत्पादन का लक्ष्य 600-700 सौ क्विंटल है।
-विपिन उपाध्याय, सहायक उद्यान निरीक्षक
32 हेक्टेयर में है राजकीय आलू प्रक्षेत्र
राजकीय आलू प्रक्षेत्र कसया ब्लॉक क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग-28 (लखनऊ-मुजफ्फरपुर हाइवे) के किनारे 32 हेक्टेयर एरिया में है। प्रक्षेत्र में पहुंचने के लिए आरसीसी रास्ता है। 17 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बागवानी, जिसमें आम, लीची व अमरूद के बागवानी के लिए सुरक्षित है। 12 हेक्टेयर बीजोत्पादन के लिए सुरक्षित था। इसमें आलू, मटर, खीरा व भिंडी आदि का बीजोत्पादन किया जाता जा रहा है।
पीएम के कार्यक्रम से भी प्रक्षेत्र में बीजोत्पादन का रकबा घटा
20 अक्तूबर 2021 को पीएम मोदी का राजकीय आलू प्रक्षेत्र स्थल पर जनसभा के कार्यक्रम हुआ था। इस दौरान बीजोत्पादन के लिए संरक्षित खेत, अमरुद व लीची की बागवानी के हरे पेड़ हेलीपैड निर्माण के चलते काटे गए थे। प्रक्षेत्र का वह हिस्सा आज भी ईंट के टुकड़ों व कंक्रीट में तब्दील पड़ा हुआ है। जिसमें खेती अथवा बागवानी करना संभव नहीं है। इसके कारण भी बीजोत्पादन का रकबा कम हुआ है। इसे लेकर जिला प्रशासन और उद्यान विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
प्रसंस्करण को उत्पादित बीज जाता बस्ती
उद्यान विभाग के मुताबिक भिंडी, मटर व खीरा का उत्पादित बीज प्रसंस्करण के लिए राजकीय विधायन केंद्र बस्ती भेजा जाता है। जबकि उत्पादित आलू को राजकीय शीतगृह अलीगंज लखनऊ भिजवाया जाता है। प्रक्षेत्र में 0.4 हेेक्टेयर में पौधशाला भी है। जिसमें सागौन, आम, लीची व अमरूद समेत अन्य प्रजाति के पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा 2.6 हेक्टेयर में आवास, सड़क, सिंचाई के लिए पक्की नाली, नलकूप, चहारदीवारी व जर्जर शीतगृह आदि हैं।